किसानों के भूमि संबंधित कार्यों को अनावश्यक किया जा रहा है विलंब ,आवेदन हो रहा है बेवजह रद्द
विनोद विरोधी
गया, बिहार।
सूबे में कथित सुशासन की सरकार में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। प्रखंड अथवा अंचल कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों के सामने किसी का कोई चारा नहीं चल रहा है। फलत: किसानों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न हो रहे हो गया है। जिले के बाराचट्टी एवं डोभी अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावा के कोई काम नहीं हो रहा है ।चाहे आपका आवेदन ऑनलाइन हो अथवा ऑफलाइन। जमीन संबंधित दाखिल खारिज, जमीन संबंधी सुधार( परिमार्जन प्लस ),अथवा छूटे हुए प्लॉट को ऑनलाइन करने की मामला हो, बगैर चढ़ावा के कोई सुनवाई नहीं हो रहा है। आलम तो यह है कि कार्यालय अवधि में कोई कर्मचारी अथवा पदाधिकारी से भेंट कर पाना मुश्किल काम होता है। हालांकि इन कामों में सुधार लाने के लिए पंचायत अथवा प्रखंड स्तर पर शिविर भी लगाए जाते हैं और आवेदन लिए जाते हैं ।लेकिन उसके बाद इसकी खानापूर्ति की जाती है और किसानों को महीनों चक्कर लगाने की बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रहा है, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी हो रहा है तथा अनावश्यक कार्यालयों का चक्कर काटनी पड़ रही है। पीड़ित आवेदकों का मानना है कि परिमार्जन के लिए कोई ऑनलाइन आवेदन करता है तो उसे निर्धारित समय तक लंबित रखा जाता है और इसके बाद आवेदन को बेवजह रद्द कर दिया जाता है। बताया जाता है कि अधिकारी व कर्मचारी बिना नाजायज रकम लिए कोई कदम नहीं उठाते। इसके लिए वे बिचौलियों को भी सेट कर रखा है। इधर सूबे की प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दल राष्ट्रीय जनता दल ने सूबे के अधिकांश प्रखंड व अंचल मुख्यालयों पर प्रखंड कार्यालय में बढ़ते भ्रष्टाचार समेत अन्य मांगों को लेकर धरना का भी आयोजन किया। इसके बावजूद अधिकारियों व कर्मचारियों पर कोई ठोस असर नहीं दिख रहा है। सवाल है सूबे में सुशासन की सरकार कहे जाने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार इन भ्रष्ट व लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों पर कब अंकुश लगाएगी अथवा इनकी मनमानी यूं ही चलती रहेगी।
© Copyright All rights reserved by India Khabar 2026