सैय्यद अनवर कादरी
छत्रपति संभाजीनगर औरंगाबाद महाराष्ट्र।
औरंगाबाद-जालना विधान परिषद चुनाव: महायुति में हलचल, समीर सत्तार की अचानक एंट्री ने बढ़ाई सियासी जटिलता
विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों के पर्चे भरने की अंतिम घड़ी में औरंगाबाद-जालना स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। महायुति के सीट वितरण में यह सीट बीजेपी को दी गई है, और पार्टी ने अधिकृत उम्मीदवार के रूप में सुहास शिरसाट का नाम घोषित किया है।
लेकिन इसी दौरान शिवसेना के विधायक अब्दुल सत्तार के पुत्र समीर सत्तार ने भी उम्मीदवार का पर्चा दाखिल कर दिया, जिससे महायुति में नया राजनीतिक पेच खड़ा हो गया है।
विशेष रूप से, समीर सत्तार स्वयं पर्चा दाखिल करने के लिए मौजूद नहीं थे, बल्कि उनके समर्थकों और प्रमुख कार्यकर्ताओं ने यह कदम उठाया। इस अनपेक्षित फैसले ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल दबाव का हिस्सा है या वास्तव में बगावत की शुरुआत है।
शिवसेना की पारंपरिक सीट से नाराजगी?
यह निर्वाचन क्षेत्र कई वर्षों से शिवसेना का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। इस बार महायुति के सीट बंटवारे में यह सीट बीजेपी को मिलने से स्थानीय शिवसेना पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। समीर सत्तार की एंट्री ने इस नाराजगी को राजनीतिक रूप दे दिया है।
तीन-तरफा मुकाबले की संभावना
इस चुनाव में बीजेपी के सुहास शिरसाट, महाविकास आघाड़ी की ओर से उद्धव ठाकरे गुट की देवयानी डोंगावकर और एमआईएम के इसाक खान ने भी उम्मीदवार का पर्चा दाखिल किया है। इस कारण से इस निर्वाचन क्षेत्र में समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।
उम्मीदवार पर्चे वापस लेने की अंतिम तारीख 4 जून है। समीर सत्तार आखिरी वक्त तक मैदान में रहेंगे या वापस जाएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। उनकी अगली चाल महायुति के अंदरूनी समीकरण और चुनाव की दिशा को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगी।
? 4 जून के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि समीर सत्तार की एंट्री महायुति के लिए सिरदर्द बनेगी या केवल राजनीतिक दबाव का हथियार।
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