हाल बाराचट्टी प्रखंड के रोही पंचायत का
रिपोर्ट:विनोद विरोधी
गया। सूबे की नीतीश सरकार ने भूमि एवं राजस्व में सुधार करने को लेकर भूमि सर्वे का कार्य करा रही है। इसी क्रम में दूसरे चरण में किसानों के बीच जमाबंदी पर्ची का वितरण कर जमीन के दस्तावेजों में हुई अशुद्धियों को सुधार के लिए पुनः आवेदन लिए जा रहे हैं। जिसके तहत नाम, पता के साथ-साथ खाता, खेसरा, रकवा, चौहद्दी एवं लगन में सुधार होना है। इसके लिए पंचायत स्तर पर शिविर लगाए गए हैं। किंतु विडंबना है कि शिविर स्थल पर इतनी भयावह भीड़ हो रही है कि फॉर्म लेने में कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।वहीं जमाबंदी पत्र जमा करने वालों को कोई प्राप्ति रसीद नहीं दी जा रही है। शिविर में कर्मियों को ना तो लैपटॉप की व्यवस्था दी गई है, ना ही प्राप्ति रसीद।जिससे किसानों के बीच ऊहापोह बना है। चर्चा तो यह भी है कि जमाबंदी फॉर्म में मोबाइल नंबर मांगी गई है और जमा करने के दौरान उनके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगी। उसके बाद एक पर्ची दी जाएगी। लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इधर जमाबंदी फॉर्म जमा करने के लिए पहुंचे जमीन मालिक व उसके रिश्तेदारों को समुचित जानकारी के अभाव में इधर-उधर भटकते दिखे गए। शिविर में आए भीड़ को लेकर किसानों के बीच अपना तफरी मचा रहा। उक्त केंद्र पर आवेदन लेने के लिए महज तीन कर्मी तैनात थे, जबकि यहां पंचायत के तमाम गांव से हजारों लोग उपस्थित थे।शिविर में आए लोगों ने बताया कि बिना प्राप्ति रसीद एवं इस तरीके के आवेदन जमा करने से कोई लाभ अथवा जमीन के कागजात में सुधार नहीं होने वाला है, इससे भ्रष्टाचार और बढ़ेगा। उनका यह भी मानना है कि सुधार के लिए ऑनलाइन भी किया गया है, लेकिन अधिकारियों अथवा कर्मचारियों के सामने बिना चढ़ावा के कोई काम नहीं होता है। किसान परेशान है और अधिकारी चांदी काट रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि प्रखंड के विभिन्न पंचायत में लगने वाले शिविर की भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। सवाल है, ऐसे में भूमि एवं राजस्व में सुधार की उम्मीद कैसे की जा सकती है? कहीं यह सुधार का सपना टांय-टांय फिस न हो जाए।
IndiaKhabar is an independent online news portal committed to accurate, timely and responsible journalism.
© 2026 IndiaKhabar. All rights reserved.