ब्यूरो चीफ फुरकान कुरैशी एडवोकेट
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आज समय की मांग है और इसे सकारात्मक तरीके से अपनाकर पाठकों को उनकी रुचि के अनुसार पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है। यह विचार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के लाइब्रेरी साइंस विभाग के प्रोफेसर शरद सोनकर ने व्यक्त किए।
प्रो. सोनकर इंडोनेशिया के योग्याकार्टा स्थित यूआईएन सुनान कलिजगा विश्वविद्यालय में आयोजित “नए युग के ग्रन्थालय एवं सूचना विज्ञान पेशेवरों की तैयारी” विषयक 9वीं अंतरराष्ट्रीय ग्रन्थालय एवं सूचना विज्ञान सोसाइटी कॉन्फ्रेंस (20 से 22 अगस्त 2025) में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लाइब्रेरी साइंस के पाठ्यक्रम में एआई को शामिल करना समय की जरूरत है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में एक सत्र को विषय विशेषज्ञ के रूप में संचालित किया और अपने अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए।
इस कॉन्फ्रेंस में विश्व के 17 देशों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और लाइब्रेरी साइंस के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।
प्रो. सोनकर ने कहा कि एआई न केवल सूचना तक पहुंच को सरल बना रहा है बल्कि शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
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