महराजगंज, उत्तर प्रदेश
महराजगंज जिले मे इफको द्वारा बिक्री केंद्र प्रभारी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आई एफ एफ डी सी, एंग्री जंक्शन केन्द्र एवं अन्य बिक्री केंद्रों का एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन फरेंदा रोड पर स्थित काका मैरिज हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा0 त्रिवेणी तिवारी वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र वसुली महराजगंज रहे।इस कार्यक्रम में डॉ विनोद कुमार सिंह वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक, इफको जनपद - गोरखपुर, विनोद कुमार मौर्य क्षेत्र प्रबंधक इफको महराजगंज, लक्ष्मीकांत प्रबंधक इफको-एमसी, मधुसूदन पांडे एसएफए,सुधांशु तिवारी एएसए, रोहित प्रजापति एमडीई एवं 60 विक्री केंद्र प्रभारी ने भाग लिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर त्रिवेणी तिवारी ने मिट्टी में कम से कम केमिकल उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने नैनो यूरिया एवं डीएपी के प्रयोग पर विशेष जोर दिया जिससे मिट्टी सुरक्षित रहेगी। साथ ही उन्होंने जैविक खेती पर भी जोर दिया। इस कार्यक्रम में उपस्थित समस्त केन्द्र प्रभारी को डॉ विनोद सिंह वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक इफको गोरखपुर द्वारा इफको की गति विधियां के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई उर्वरक की उपलब्धता पर भी विशेष जोर दिया गया।सभी केन्द्र प्रभारी को नैनो उर्वरक के प्रयोग पर विशेष जोर दिया, इस प्रयोग से पर्यावरण व मृदा, सुरक्षित रहेगा इसके साथ साथ अन्य उर्वरक जैसे जल विलेय उर्वरक, जैव उर्वरक, बायो डिकमपोजर, जैव उर्वरक एवं अन्य उर्वरक के लाभ पर विशेष जोर दिया गया।किसानों को नैनो उर्वरकों के प्रयोग की विधियां किसानों को अच्छी गुणवत्ता के इफको नैनो उर्वरकों को प्रयोग करने से खेती की लागत घटती है,उपज में बढ़ोतरी होती है एवं पर्यावरण भी सुरक्षित होता है। इससे उर्वरक के लिए देश की निर्भरता दूसरे देशों पर भी कम होती है जिससे देश के आत्म सम्मान में भी वृद्धि होती है। अतः यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि किसानों को सही प्रयोग विधि बताकर नैनों उर्वरकों की बिक्री बढ़ाई जाए।इस कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विनोद कुमार मौर्य क्षेत्र प्रबंधक इफको महराजगंज ने किया। उन्होंने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्रयोग करने की विधि , नैनो जिंक, नैनो कॉपर साथ, इफको के विभिन्न उत्पादों पर चर्चा की एवं कृषि के लिए उसके लाभ को बताया। कार्यक्रम में रणंजय सिंह आईएफएससी कृषक सेवा केंद्र सिंदुरिया एवं रामानन्द सिंह क्रय-विक्रय बन्नी ढाला ने अनुभव को बताया।
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