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देशभक्ति का अनुपम उदाहरण: ‘सेवक-ए-हिंद’ अब्दुल हबीब यूसुफ़ मुर्फ़ानी।

15 अगस्त स्पेशल 

?️बक़लम: अब्दुल नईम कुरैशी 

लखनऊ/उत्तर प्रदेश 15/अगस्त/25

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में ऐसे कई नाम हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। इन्हीं महान देशभक्तों में एक नाम है – अब्दुल हबीब यूसुफ़ मुर्फ़ानी। गुजरात के धोराजी शहर के मेमन समुदाय से आने वाले इस व्यापारी ने अपनी सम्पूर्ण संपत्ति नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फ़ौज (Indian National Army) को दान कर दी।

*नेताजी की सेना के लिए सब कुछ कुर्बान*

1942 में आज़ाद हिंद फ़ौज का पुनर्गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जापान के सहयोग से किया। दक्षिण-पूर्व एशिया में करीब 40,000 प्रशिक्षित स्त्री-पुरुष सैनिकों की इस सेना का उद्देश्य था – अंग्रेज़ी हुकूमत को परास्त कर भारत को स्वतंत्र कराना। इस मिशन में संसाधनों की कमी को पूरा करने के लिए, अब्दुल हबीब यूसुफ़ मुर्फ़ानी ने अपना पूरा खज़ाना – सोना, हीरे, मोती और अन्य कीमती सामान – नेताजी को सौंप दिया।

*केवल दो वर्दियों की चाहत*

इतना बड़ा दान करने के बाद जब नेताजी ने उनसे पूछा कि बदले में वे क्या चाहते हैं, तो मुर्फ़ानी ने केवल आज़ाद हिंद फ़ौज की दो जोड़ी वर्दी मांगी। यह केवल भौतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक सम्मान का प्रतीक था – उस सेना का हिस्सा बनने की भावना, जो भारत की आज़ादी के लिए लड़ रही थी।

*‘सेवक-ए-हिंद’ का सम्मान*

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें तमगा-ए-सेवक-ए-हिंद – आज़ाद हिंद सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान – प्रदान किया। नेताजी ने इस मौके पर कहा था –

 “कुछ लोग कहते हैं, हबीब पागल हो गया है। मैं सहमत हूं। मैं चाहता हूं कि आप सभी भारतीय पागल हो जाएं। अपने देश, अपनी मातृभूमि के लिए जीत और आज़ादी हासिल करने के लिए हमें ऐसे ही लोगों की जरूरत है।”

*इतिहास में अमर योगदान*

अब्दुल हबीब यूसुफ़ मुर्फ़ानी का त्याग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रेरणा का स्रोत है कि जब देश संकट में हो, तो जाति, धर्म या भाषा से ऊपर उठकर सभी को एकजुट होना चाहिए। उनका यह बलिदान आज भी स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है।

*(संपादकीय टिप्पणी)*

आज जब हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि हम उन गुमनाम नायकों को याद करें, जिनके त्याग और बलिदान ने आज़ादी की नींव रखी। अब्दुल हबीब यूसुफ़ मुर्फ़ानी जैसे देशभक्तों की गाथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बननी चाहिए।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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