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जो हुकूमत इंसाफ पसंद नहीं होती उसका चलना मुश्किल - मौलाना फजलुर्रहीम

वक्फ संशोधन कानून का देशभर में हो रहा विरोध का सिलसिला जारी।

जयपुर, राजस्थान।

हाल ही किए गए वक्फ संशोधन कानून का देशभर में विरोध का सिलसिला जारी है। इस विरोध-प्रदर्शन और अभियान की कमान देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, जमीयतुल उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों ने संभाल रखी है। वहीं इनका एक साझा अभियान ह्यवक्फ बचाओ, संविधान बचाओह्ण के नाम से देशभर में चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले की कड़ी के तहत गुरुवार को यहां ग्रांड इंडियाना रेस्टोरेंट में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना फजलुर्रहीम मुजद्दिदी, ह्यवक्फ बचाओ, संविधान बचाओह्ण अभियान के संयोजक डॉ. कासिम रसूल इलयास, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मुहम्मद नाजिमुद्दीन, जमीयतुल उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश उपाध्यक्ष हाफिज मंजूर अली खान, एसडीपीआई के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन सहित अन्य कई पदाधिकारी शामिल हुए। बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना फजलुर्रहीम मुजद्दिदी ने कहा कि हुकूमतों को बदल-इंसाफ पसंद होना चाहिए, नाइंसाफी और जुल्मों-ज्यादती लंबे वक्त तक नहीं चलती है। उन्होंने देश में मुगल काल, अंग्रेजों के राज से लेकर वर्तमान सरकारों के कई उदाहरण देते हुए संदर्भित मामले में विस्तार से प्रकाश डाला। मौलाना मुजद्दिदी ने कहा-जो हुकुमत इंसाफ पसंद नहीं होती वो अधिक समय तक नहीं चलती है, ऐसी सरकार का अंत अवश्य होता है।

*वक्फ संशोधन अधिनियम भेदभावपूर्ण : कासिम रसूल*

वहीं डॉ. कासिम रसूल इलयास ने कहा कि आज तक जितने भी वक्फ संशोधन हुए है उनसे पहले कम्यूनिटी से राय आवश्यक रूप से ली जाती रही है, किंतु वर्तमान में केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में समाज को पूरी तरह अजरअंदाज किया है। वे बोले-केंद्र सरकार द्वारा एक तरफा पारित किए गए वक्फ अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधन भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक हैं। ये भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 25, 26 और 29 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों को कमजोर करते हैं और मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को जब्त करने तथा उन्हें नष्ट करने के उद्देश्य से एक जानबूझकर किए गए प्रयास का हिस्सा हैं।

*वक्फ उम्मीद पोर्टल की स्थापना अवैधानिक*

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. कासिम रसूल ने वक्फ उम्मीद पोर्टल की स्थापना को अवैधानिक बताते हुए कहा-यह न्यायालय की अवमानना है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और सरकार ने 6 जून से वक्फ उम्मीद पोर्टल शुरू कर दिया है। इसके माध्यम से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य कर रही है। यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैधानिक है और स्पष्ट रूप से न्यायालय की अवमानना है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इन संशोधनों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। साथ ही, हम 'वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ के बैनर तले पूरे देश में एक शांतिपूर्ण, जन अभियान शुरू कर रहे हैं।

*ये भी रहे उपस्थित*

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ह्यवक्फ बचाओ, संविधान बचाओह्ण अभियान कमेटी की ओर से आज यहां आयोजित एक मिटिंग में विभिन्न सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल रहे। इस दौरान अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष केसी घुमरिया, अंजुमन तालिमुल मुसलेमीन के सचिव शब्बीर खान, राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ्स के पूर्व सदस्य एवं मुस्लिम मुसाफिर खाना प्रबंध कमेटी के सचिव शौकत कुरैशी, जामा मस्जिद कमेटी के पूर्व सदर नईमुद्दीन कुरैशी, दलित-मुस्लिम एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल लतीफ आरको, प्रोफेसर एम हसन, इसाई मिशनरी के फादर विजय, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष वकार अहमद खान आदि मौजूद रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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