शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
स्थानीय नगर थाना क्षेत्र में अवस्थित,बेतिया सरकारी मेडिकल कॉलेजअस्पताल में इन दोनों रोगियों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो रही है, मगर इसकेअनुपात में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ,कर्मियों की संख्या में भारी कमी है। संवाददाता का विश्वसनिये सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार,इस सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सभी स्तर के 63%पद खाली पड़े हुए हैं। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग केवल आंकड़ों के खेल में व्यस्त है,इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग को इस बात की अच्छी जानकारी है कि किस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किस स्तर के कितना पद खाली हैं,इसकी जानकारी रहते हुए भी इस संदर्भ में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है,जिसके कारण रोगियों का इलाज सही तरह से नहीं हो पा रहा है।अभी के इस समय में डेंगू की बीमारी चरम सीमा पर पहुंच गई है,प्रतिदिन मरीजों की संख्या दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती ही जा रही है,मगर इसकी देखभाल करने के लिए डॉक्टर,नर्सिंग स्टाफ, और कर्मियों की अप्रत्याशित पद खाली हैं। इस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी विभिन्न स्तरों के कर्मियों की 63%पद बहुत दिनों से खाली पड़े हुए हैं,जिसके कारण रोगियों का इलाज जैसी होनी चाहिए वैसा नहीं हो पा रही है।बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग इन दिनों मुकदर्शक बना हुआ है,सभी बातों की सही स्थिति की जानकारी रहते हुए भी केवल आंकड़ों के खेल खेल रही है,साथ ही स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न प्रकार के लाभान्वित योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए केवल जुवानी भुगतान हो रही है।इस बेतिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी मेल वार्ड महिला वार्ड,प्रसूति वार्ड,
ओपीडी,इमरजेंसी वार्ड, महिला मेडिसिन सर्जरी, पुरुष मेडिसिन सर्जरी के वार्डों में डॉक्टर,नर्शिंग स्टाफ,कर्मियों की 63%पद खाली रहने के कारण रोगियों का इलाज सही नहीं हो पा रहा है,इलाज के नाम पर केवल खाना पूर्ति की जा रही है।
स्थानीय सांसद,विधायकों को सारी बातों की जानकारी रहते हुए भी कुछ बोलने से मुंह मोड़ रहे हैं। इसअस्पताल में महिला मेडिसिन,पुरुष मेडिसिन, महिला सर्जरी,पुरुष सर्जरी के 30- 30 बेड लगे हुए हैं,मगर रोगियों के संख्या तीनगुनी है। रोगियों को बेड उपलब्ध नहीं रहने के कारण,जमीन में चटाई एवं कपड़ा बिछाकर इलाज करवा रहे हैं। रोगियों की संख्याअधिक बढ़ जाने के कारण डॉक्टर,नर्सिंग स्टाफ, कर्मियों की छुट्टी भी रद्द कर दी जाती है। पद खाली रहने के कारण जांच रिपोर्ट सही समय पर नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण मरीजों के इलाज करने मेंअधिकाअधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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