Tranding

किछौछा शरीफ़ में अकीदत व शानो-शौकत के साथ सम्पन्न हुआ मरकज़ी उर्स।

मुल्क में अमन-चैन व तरक्की के लिए की गई ख़ास दुआ

सेराज अहमद कुरैशी

किछौछा शरीफ़, अम्बेडकर नगर (उत्तर प्रदेश)।

अहले सुन्नत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक एवं रूहानी मरकज़ आस्ताना आलिया अमीर-ए-मिल्लत, अमीरगंज, किछौछा शरीफ़ में हुज़ूर अमीर-ए-मिल्लत हज़रत सैयद शाह अमीर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 32वाँ उर्स मुबारक, हुज़ूर बाबा-ए-मिल्लत हज़रत सैयद शाह तनवीर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 12वाँ उर्स मुबारक तथा हुज़ूर सूफ़ी-ए-हिन्द हज़रत सैयद शाह गुल अख़्तर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 6वाँ उर्स मुबारक दो दिवसीय धार्मिक आयोजनों के साथ अत्यंत श्रद्धा, अनुशासन और रूहानी वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया।

यह मुबारक उर्स हुज़ूर फ़ाज़िले बग़दाद हज़रत अल्लामा मौलाना सैयद हसन अस्करी अशरफ़ इब्ने अरबी अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी (जानशीन-ए-हुज़ूर अमीर-ए-मिल्लत, हुज़ूर सूफ़ी-ए-हिन्द एवं जानशीन-ए-हुज़ूर मुहद्दिस-ए-आज़म हिन्द) की सरपरस्ती में आयोजित हुआ, जबकि उर्स की क़ियादत हज़रत सूफ़ी फ़ारूख साहब (जानशीन-ए-हुज़ूर बाबा-ए-मिल्लत) ने फ़रमाई।

उर्स की शुरुआत परचम-कुशाई और तराना से हुई। इसके बाद हल्क़ा-ए-ज़िक्र, महफ़िल-ए-नात, मनक़बत और वाज़-ओ-इरशाद की रूहानी महफ़िलें सजाई गईं, जिनमें देश के विभिन्न राज्यों से आए उलेमा-ए-किराम, मशाइख़, हफ़्फ़ाज़, नातख़्वाँ और बड़ी संख्या में मुरीदीन, मुतअक़िदीन व ज़ायरीन ने शिरकत कर अपनी अकीदत का नज़राना पेश किया।

उर्स के दूसरे दिन नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद क़ुरआन-ख़्वानी सम्पन्न हुई। इसके पश्चात प्रातः 8:30 बजे ख़ानक़ाह-ए-हुज़ूर अमीर-ए-मिल्लत से पारम्परिक जुलूस-ए-संदल व चादर रवाना हुआ। यह जुलूस निजामुद्दीन पुरा, खादिम टोला, चौधराना, किछौछा बाज़ार सहित विभिन्न मार्गों से गुज़रते हुए आस्ताना आलिया पहुँचा। रास्ते भर अकीदतमंदों ने फूलों की वर्षा कर जुलूस का इस्तक़बाल किया तथा दरूदो-सलाम और नात-ओ-मनक़बत की सदाएँ गूँजती रहीं।

आस्ताना आलिया पहुँचने पर सज्जादानशीन हज़रत सैयद हसन अस्करी अशरफ़ साहब ने विशेष दुआ कर देश की तरक्की, खुशहाली, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, इंसानियत की भलाई तथा पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा की सलामती के लिए दुआएँ फ़रमाईं। दुआ में उपस्थित सभी लोगों ने पूरे अदब और ख़ुलूस के साथ आमीन कहा।

इसके उपरांत दोपहर बाद नमाज जुमा 1:30 बजे लंगर-ए-आम का आयोजन किया गया, जिसमें हज़ारों ज़ायरीन ने बिना किसी भेदभाव के शिरकत कर तबर्रुक प्राप्त किया। नमाज़-ए-असर के बाद ज़ियारत-ए-मू-ए-मुबारक एवं अन्य मुक़द्दस तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई, जिससे अकीदतमंदों में विशेष रूहानी कैफ़ियत देखने को मिली। रात्रि में नमाज़-ए-इशा के बाद 10:20 बजे आख़िरी कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। इसके बाद महफ़िल-ए-सिमा का आयोजन हुआ, जहाँ सूफ़ियाना कलाम और मनक़बतों के माध्यम से औलिया-ए-किराम की शिक्षाओं को प्रस्तुत किया गया। पूरी फ़िज़ा इश्क़-ए-रसूल ﷺ, ज़िक्र-ए-इलाही और सूफ़ियाना रंग में रंगी दिखाई दी।

उर्स के सफल आयोजन पर उर्स कमेटी ने देश-विदेश से तशरीफ़ लाने वाले समस्त मुरीदीन, मुतअक़िदीन, मुहिब्बीन, मेहमानों, ज़ायरीन, उलेमा-ए-किराम, प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वयंसेवकों तथा सभी सहयोगियों का दिल की गहराइयों से इस्तक़बाल करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया। कमेटी ने कहा कि सभी लोगों ने पूरे अदब, अनुशासन और मोहब्बत के साथ उर्स के तमाम कार्यक्रमों को सम्पन्न कराया, जो ख़ानक़ाही परम्पराओं और सूफ़ियाना तहज़ीब की बेहतरीन मिसाल है।

इस अवसर पर मीडिया प्रभारी मो.अशफाक आरिफ़ ने कहा कि औलिया-ए-किराम की तालीमात इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे, सेवा, सहिष्णुता और अमन का पैग़ाम देती हैं। इन्हीं शिक्षाओं पर अमल करके समाज में एकता, सद्भाव और भाईचारे को और अधिक मज़बूत किया जा सकता है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
2

Leave a comment

Most Read

Advertisement

Newsletter

Subscribe to get our latest News
About IndiaKhabar

IndiaKhabar is an independent online news portal committed to accurate, timely and responsible journalism.

Follow Us

© 2026 IndiaKhabar. All rights reserved.