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कुर्बानी बख्शिश का जरिया बनेगी-मौलाना महमूद रजा कादरी

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

ईद-उल-अजहा त्योहार पर कुर्बानी के फजाइल व मसाइल बयान किए गए। त्योहार के मौके पर साफ-सफाई का ख्याल रखने, भाईचारगी बढ़ाने व अमन ओ अमान कायम रखने की अपील की गई। वहीं कुर्बानी के मसले मसाइल से संबंधित सवालों का जवाब शहर‌ काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी 8604887862, 9598348521, मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी 9956971232, कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी‌ 7860799059 से हासिल किया जा सकता है। 

शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने अवाम से अपील की है कि ईद-उल-अजहा त्योहार अमन ओ अमान और उत्साह के साथ मनाएं। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। कुर्बानी स्थलों के चारों तरफ पर्दा लगाकर कुर्बानी करें। अपशिष्ट पदार्थ, खून व हड्डी वगैरा इधर-उधर न फेंकें बल्कि गड्ढे में दफन कर दें। प्रशासन का सहयोग करें। सोशल मीडिया पर न ही कुर्बानी की फोटो डालें और न ही वीडियो। त्योहार में गरीबों का खास ख्याल रखें। कुर्बानी 28, 29 व 30 मई यानी तीन दिन तक ही होगी। 

हजरत मुकीम शाह मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज अहमद ने कहा कि कुर्बानी हमें शिक्षा देती है कि जिस तरह से भी हो सके अल्लाह की राह में खर्च करो। कुर्बानी का जानवर कयामत के दिन अपने सींग और बाल और खुरों के साथ आएगा और फायदा पहुंचाएगा। कुर्बानी का खून जमीन पर गिरने से पहले अल्लाह के नजदीक मकामे कबूलियत में पहुंच जाता है। लिहाजा कुर्बानी खुशी से करनी चाहिए। एक हदीस में आया है कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि कुर्बानी तुम्हारे पिता हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। लोगों ने अर्ज किया इसमें क्या सवाब है? फरमाया हर बाल के बदले नेकी है।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम में दो खास ईद है ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा। ईद-उल-फित्र व ईद-उल-अजहा के दिन रोजा रखना हराम है क्योंकि यह दिन मेहमान नवाजी और अल्लाह की तरफ से तोहफा और ईनाम है। कुर्बानी पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व पैगंबर हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जिसे अल्लाह ने इस उम्मत के लिए बाकी रखा। साफ-सफाई अल्लाह तआला को पसंद है इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। कुर्बानी की फोटो व वीडियो न बनाएं और न ही अपने कुर्बानी के जानवर की नुमाइश करें। खास जानवर को खास दिनों में कुर्बानी की नियत से जिब्ह करने को कुर्बानी कहते हैं। जिनके यहां कुर्बानी न हुई हो उनके घर सबसे पहले गोश्त भेजें। जिन पर कुर्बानी वाजिब है वह कुर्बानी जरूर करवाएं।

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम चौदह सौ साल से साफ-सफाई की शिक्षा देता चला आ रहा है। साफ-सफाई अल्लाह को पसंद हैं इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। कुर्बानी खुश दिली से करें। मुसलमानों का हर त्योहार शांति की शिक्षा देता है। लिहाजा इसका ख्याल रखें कि हमारे किसी काम से किसी को भी जर्रा बराबर भी तकलीफ न होने पाए। जिन पर कुर्बानी वाजिब है वह कुर्बानी जरूर कराएं। यह कुर्बानी उनके बख्शिश का जरिया बनेगी।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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