शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार
नगर निगम,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने का सिलसिला जारी है,मगर इन प्रशासनिक पदाधिकारी को अतिक्रमण किए गए दुकानदारों को पूर्व में नोटिस देनी चाहिए,उनको निश्चित स्थान देकर उनकी दुकानों, झोपड़ी,ठेला,गुमटी,मकान को हस्तांतरित करने के उपरांत हीअतिक्रमण हटाना चाहिए,बहुत ऐसे अतिक्रमणकारी हैं जो मजबूरीवस रोटी रोजी, परिवार का पालन पोषण करने हेतु दुकानदारी करते हैं,
बहुत ऐसेअतिक्रमणकारी हैं, जोअतिक्रमण करके दूसरों से पैसाअर्जित करने के लिए उनके जिममें कर देते हैं, ऐसे अतिक्रमणकारियों से अतिक्रमणमुक्त कराना अनिवार्य प्रतीत होता है।
राजस्व भूमि सुधार विभाग के मके द्वारा यह आदेश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में किसी की आजीविका नहीं छीनी जाए,
उनकीआजीविका को संरक्षण देते हुएअतिक्रमण हटाने का काम किया जाए।
ठेला,गुमटी,झोपड़ी,खुनचा, सब्जी बेचने वाले को वेंडिंग जोन में जगह देकर उनको हटाया जाए,जिससे गरीबों के आजीविका समाप्त नहीं हो सके।शहर का सौंदर्जीकरण, यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने,जाम की समस्या को दूर करने,स्वच्छता कायम रखने,नागरिक सुविधा को बहाल रखने मेंअतिक्रमण हटानाअनिवार्य होता है , मगर गरीबों के आजीविका को ध्यान में रखते हुए ऐसा काम करना है,उनके लिए रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था,या पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की जाए।
न्यायालय के आदेश के अनुसारअतिक्रमण हटाया जाए,मगर मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस काम को अंजाम देना है। इस संबंध में जिला स्तर के सभी प्रशासनिक पदाधिकारी को दिया जा चुका है,सभी CO को हिदायत दी गई है कि अतिक्रमण वादों का
विधिवत संधारण करें। इस आदेश के आलोक में, स्थानीय मानवाधिकार सह सामाजिक कार्यकर्ता,सुरैया सहाब ने जिला स्तर के सभी पदाधिकारी से मांग की है कि अतिक्रमणकार्यों को हटाने के पूर्व में उनका सामंजस किया जाए,उनकी आजीवाका को नहीं छीना जाए,उन्हें बसाने, आजीविका चलाने,परिवार का पालन पोषण करने हेतु प्रत्येक स्तर से उनकी मदद की जाए ताकि उनके परिवार को भुखमरी का शिकार नहीं होना पड़े,यही मानवता की ललकार है,इससे मानवाधिकार का संरक्षण भी होगा,साथ ही गरीब परिवारों के मानवअधिकार का हनन भी नहीं होगा।जिला स्तर के सभी पदाधिकारी से जनहित मेंअपील करती हूं कि गरीब मजदूर, बेसहारा,वंचित वर्ग के दैनिक रोटी रोजी कमाने वाला के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए उनकी आजीविका बरकरार रखी जाए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो विवश होकर इन लोगों के पक्ष में धरना,प्रदर्शन,भूख हड़ताल करने पर विवश रहूंगीं।
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