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१९६२ हेल्पलाइन की बड़ी उपलब्धि, पशुपालकों के लिए बनी जीवनरेखा

ब्युरो चीफ सैय्यद अनवर कादरी

छत्रपति संभाजीनगर, औरंगाबाद

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जब पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और 1962 मोबाइल वेटरनरी क्लिनिक के समन्वय से पशुपालकों को बड़ा सहारा मिला है। इस सुविधा के कारण न केवल उपचार में लगने वाला समय कम हुआ है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में भी पशुओं को “गोल्डन ऑवर” में समय पर इलाज मिलने से हजारों पशुओं की जान बचाई जा सकी है।

1962 कॉल सेंटर और मोबाइल वेटरनरी क्लिनिक के तकनीकी तालमेल से अब पशुपालकों को उनके घर तक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जो ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पिछले एक वर्ष में कॉल सेंटर को कुल 4,01,992 कॉल प्राप्त हुए, जिनमें से 3,78,035 मामलों का सफल समाधान किया गया। खास बात यह है कि 34,979 पशुपालकों ने इस सेवा का लाभ उठाया। ये आंकड़े पशु चिकित्सा सेवाओं की प्रभावशीलता और समर्पण को दर्शाते हैं।

आपातकालीन स्थितियों जैसे दुर्घटना, विषबाधा या कठिन प्रसव में “गोल्डन ऑवर” में इलाज बेहद जरूरी होता है। कॉल मिलने के मात्र 1.5 घंटे के भीतर पशु चिकित्सा टीम मौके पर पहुंच जाती है। इस त्वरित सेवा के चलते अब तक 64,759 पशुओं की जान बचाई जा चुकी है, जिनमें 29,130 बड़े और 35,569 छोटे पशु शामिल हैं।

पहले छोटे-मोटे इलाज के लिए भी पशुओं को अस्पताल ले जाना कठिन और खर्चीला होता था, लेकिन अब विशेषज्ञ पशु चिकित्सक सीधे किसानों के खेत तक पहुंच रहे हैं। इससे न केवल इलाज आसान हुआ है, बल्कि समय पर मार्गदर्शन मिलने से संक्रामक बीमारियों की रोकथाम भी संभव हो रही है। इससे दुग्ध व्यवसाय को भी स्थायी और लाभकारी स्वरूप मिल रहा है।

1962 हेल्पलाइन द्वारा दी जाने वाली प्रमुख सेवाएं:

बीमार पशुओं का त्वरित उपचार

छोटी और बड़ी शल्य चिकित्सा

वैज्ञानिक पद्धति से बधियाकरण

कृत्रिम गर्भाधान

कीड़ों (जंत) पर नियंत्रण

विभिन्न बीमारियों से बचाव हेतु टीकाकरण

बांझपन की जांच और उपचार

पशु स्वास्थ्य व पोषण संबंधी मार्गदर्शन

आपातकालीन सेवाएं (दुर्घटना, सर्पदंश, जलना आदि)

सरकारी योजनाओं की जानकारी

व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से जानकारी

तकनीक के साथ भविष्य की दिशा: कॉल सेंटर में आधुनिक सॉफ्टवेयर, कॉल रिकॉर्डिंग और फीडबैक सिस्टम के उपयोग से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। भविष्य में इस सेवा को और मजबूत बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्राथमिक सलाह और व्हाट्सएप चैटबॉट को शामिल करने की योजना है।

इन तकनीकों के माध्यम से हर कॉल का सटीक विश्लेषण, पशु चिकित्सकों के कार्य का मूल्यांकन और दूरदराज क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार योजना बनाना संभव होगा। AI के जरिए पशुपालकों को तुरंत प्राथमिक उपचार और रोकथाम की जानकारी मिल सकेगी।

पशुसंवर्धन विभाग के आयुक्त डॉ. किरण पाटील ने विश्वास जताया कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से पशु चिकित्सा सेवाओं में बड़ा बदलाव आएगा, जिससे पशुधन की हानि कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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