अमित कुम
देश व्यापी आंदोलन के आव्हान पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने अपर श्रमायुक्त कार्यालय सर्वोदय नगर में धरना दे कर सरकार को चेताया।
ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि नए श्रम कानून और नियम बना कर यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को कमजोर कर मज़दूरों के साथ छल किया गया है। ये कानून श्रमिकों को औपनिवेशिक काल जैसी शोषक परिस्थितियों में धकेल सकते हैं क्योंकि काम के घंटों की सीमा अनिश्चित होने और नियोक्ताओं को अधिक शक्ति मिलने मिलेगी।
मज़दूर संगठन लगातार इन श्रमिक-विरोधी, नियोक्ता-समर्थक श्रम कानूनों का विरोध करते आ रहे हैं और इन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जिन्हें 'व्यापार करने में आसानी' को बढ़ावा देने के लिए 'श्रम सुधार' के नाम पर लाया गया है।
केंद्र सरकार श्रम संहिता को वापस लेने या इस मुद्दे पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ सार्थक बैठक बुलाने के लिए अनिच्छुक है, जबकि इसके विरोध में 12 फरवरी को ऐतिहासिक आम हड़ताल आयोजित की गई थी।"
नए कानून पूरी तरह से कंपनियों के फायदे के लिए बनाए गए हैं और इनमें कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई है। उनका आरोप है कि सरकार सिर्फ 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी व्यापार को आसान बनाने पर ध्यान दे रही है, जबकि मजदूरों के अधिकारों को ताक पर रख दिया गया है। संगठनों का मानना है कि इन कानूनों के आने से कामगारों का शोषण बढ़ेगा, इसलिए वे लंबे समय से इन्हें रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि 12 फरवरी 2026 को हुई बड़ी हड़ताल के बाद भी सरकार ने इस मुद्दे पर बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसलिए हमारी लड़ाई निरंतर चलती रहेगी।
धरने के दौरान राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सहायक श्रमायुक्त कानपुर रामलखन पटेल को दिया गया।
धरने में असित कुमार सिंह, एच एन तिवारी, गौरव दीक्षित, राजीव खरे, एस ए एम जैदी, आर एस मिश्रा, आर डी गौतम, राम प्रकाश राय , पी एस बाजपई आर पी श्रीवास्तव,राणा प्रताप सिंह, उमेश शुक्ला , राजेश सिंह, काम. विजय, उमाकांत , आशा खालिद, ओम प्रकाश, शशिकांत, ओपी रावत,विनोद तिवारी, अविनाश यादव, रमेश भदौरिया, विजय गुप्ता, राजदीप, अजीत, देवेंद्र सिंह, रवि मलिक शामि
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