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नानाजी देशमुख के विचार व आदर्श प्रेरणास्रोत :-अखिलेश्वर धर द्विवेदी

 गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। 

नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर शुक्रवार को शहर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुए। माया बाजार में सामाजिक कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिलेश्वर धर द्विवेदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में द्विवेदी ने कहा कि चंडिकादास अमृतराव देशमुख नानाजी राष्ट्र चिंतक होने के साथ समरसता व ग्रामोद्योग को बढ़ावा दिया। संघ के प्रचारक होने के साथ प्रमुख भारतीय समाजसेवी, शिक्षाविद और नेतृत्व कर्ता थे। गोरखपुर से विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। गोरखपुर में होली के अवसर पर निकलने वाली रंगभरी शोभायात्रा के शुभारंभ करके सामाजिक समरसता में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।देश का पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित कर उन्होंने भारतीय संस्कारयुक्त शिक्षा की नींव रखी।  ग्रामीण विकास, स्वावलंबन और सामाजिक समरसता के लिए उनके प्रयास आज भी प्रेरणास्रोत हैं। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न तथा पद्म श्री से सम्मानित किया। नगर कार्यवाह शैलेन्द्र जी ने कहा कि नानाजी देशमुख का सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनके आदर्श को आत्मसात करके पंच परिवर्तन संभव है। परमानन्द शर्मा व रमाशंकर गुप्ता ने संबोधित किया। इसी क्रम में बाला प्रसाद तुलस्यान की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी गई।अंत में उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही गोरखपुर में स्मृति में उनकी प्रतिभा, सड़क व द्वार स्थापित करवाने पर विमर्श किया गया।इस अवसर पर स्वयंसेवक व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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