शहाबुद्दी अहमद
बेतिया, बिहार
बेतिया राज की जमीन को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक, दुरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। देश की सर्वोच्चअदालत ने स्पष्ट किया है कि1898 से पहले की गई बंदोबस्ती पूरी तरह से वैध मानी जाएगी,जबकि इसके बाद की गई बंदोबस्ती को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।इस निर्णय से पश्चिम चंपारण सहितआसपास के इलाकों में बसे उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जग गई है,जिनकी पूर्व जमाबंदी दशकों से चली आ रही है,जो लंबे समय से कानूनीअसमंजस में जीवन जी रहे हैं,सरकार की पहल गरीब के हित में,नई नियमावली की तैयारी,सुप्रीम कोर्ट केआदेश केआलोक में राज्य सरकार ने यह संकेत दिया है कि वर्तमान में, सामाजिक, जमीनी हालात को देखते हुए एक नई नियमावली लाई जाएगी, जो गरीबों, भूमिहीन, मजदूरों, कमजोर वर्ग के लोगों के साथअन्याय नहीं हो सके।प्रस्तावित नियमों में दो कट्ठा तक जमीन रखने वाले,पांच कट्ठा तक जमीन रखने वाले,इससेअधिक भूमि धारकों के लिएअलग-अलग प्रावधान तय किए जाने की योजना है।सरकार की मंशा साफ है कि जिन परिवारों के पास पूर्व से वैध जमाबंदी चलीआ रही है,उन्हें उसका पूरा संरक्षण मिले,किसी भी गरीब परिवार को उजाड़ने की स्थिति नहीं बने। हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। यह फैसला केवल कानूनी नहीं,बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ निर्णय माना जा रहा है।बेतिया राज की जमीन पर वर्षों से बसे लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें बेईज्जती के डर से मुक्ति मिलेगी,साथ ही उनके स्थान सुरक्षित रहेंगे।
© Copyright All rights reserved by India Khabar 2026