महंगाई और बेरोज़गारी ने दुनिया को चेताया, भारत को सीख लेनी चाहिए : सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी
जयपुर, राजस्थान।
ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के चेयरमैन व चीफ़ क़ाज़ी सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने ईरान के मशहद समेत कई शहरों में महंगाई के खिलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हालात किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि जब रोटी महंगी हो जाती है और रोज़गार उम्मीद से दूर चला जाता है, तब खोखले नारों से हालात नहीं संभलते। महंगाई और बेरोज़गारी किसी भी समाज की सहनशक्ति की आख़िरी परीक्षा होती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की पहचान शांति, संविधान और संवाद से है। हम भारतवासी हैं, हम किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते, लेकिन वैश्विक घटनाओं से सीख लेना हमारी ज़िम्मेदारी है। भारत की ताक़त यही है कि यहां सवाल सड़क की हिंसा से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हल होते हैं।
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने आगे कहा कि लाठी से डर पैदा किया जा सकता है, भरोसा नहीं। गोलियों से ख़ामोशी लाई जा सकती है, स्थिरता नहीं। सत्ता को यह समझना होगा कि जनता की थाली और युवाओं का रोज़गार ही किसी भी व्यवस्था की असली बुनियाद होता है।
उन्होंने युवाओं की बेरोज़गारी पर चिंता जताते हुए कहा कि हाथों में डिग्रियां और आंखों में सपने लेकर खड़ा युवा जब दरवाज़ा खटखटाता है, तो उसे खोखले नारे नहीं, रोज़गार चाहिए। अगर इस आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया, तो इतिहास सवाल ज़रूर करेगा।
अंत में उन्होंने कहा कि मतभेद और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है। हम सबका फ़र्ज़ है कि सवाल भी करें और देश को मज़बूत भी रखें। भारत की शांति, एकता और संविधानिक मर्यादा हमारी लाल रेखा है।
IndiaKhabar is an independent online news portal committed to accurate, timely and responsible journalism.
© 2026 IndiaKhabar. All rights reserved.