वक्ताओं ने कहा -संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों के बदौलत ही अपने जीवन में ला सकते हैं बदलाव।
रिपोर्ट :विनोद विरोधी
गया, बिहार।
जिले के डुमरिया प्रखंड स्थित करमौन गांव में शोषित समाज दल के तत्वधान में 'भारतीय संविधान की प्रासंगिकता' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन अशोक प्रसाद की अध्यक्षता में किया गया। परिचर्चा में भारतीय संविधान के मूल स्वरूप एवं इसके सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। परिचर्चा में जाने-माने मानववादी चिंतक वीरेंद्र कुमार अर्जक ने कहा कि संविधान के बदौलत ही प्रत्येक नागरिक नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों एवं सरकार से मूलभूत अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं और अपनी समस्याओं का निदान कर सकते हैं। इस अवसर पर शिक्षाविद प्रसिद्ध सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में भारत की स्थिति भयावह बनती जा रही है। देश के शासक वर्ग को कमेरा समाज से कोई लगाव नहीं के बराबर है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जाहिर किया कि वर्तमान सरकार कमेरा वर्ग से काम न लेकर बड़ी-बड़ी मशीनों से काम ले रही है, जिससे शासक वर्ग और कमेरा समाज के बीच अलगाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर, महामना रामस्वरूप वर्मा एवं अमर शहीद जगदेव प्रसाद के बताएं मार्ग पर चलकर ही 90 फ़ीसदी कमेरा समाज की एकता स्थापित होगी। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करने वालों में नारद मुनि लोहार, बनारसी दास, अरविंद महतो समेत अन्य लोग शामिल थे।
IndiaKhabar is an independent online news portal committed to accurate, timely and responsible journalism.
© 2026 IndiaKhabar. All rights reserved.