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मानवअधिकार का संरक्षण, मूलभूतअधिकारों के प्रति प्रासंगिक- सुरैया सहाब

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानवाअधिकार दिवस पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों, कार्यालय,नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन,मानवाधिकार प्रतिष्ठान में बड़े हीआकर्षक, भव्य रूप सेअंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमआयोजित किए गए।

इसअवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुएअंतर्राष्ट्रीय मानवअधिकार संघ के पूर्व जिलाअध्यक्ष सह सामाजिक कार्यकर्ता,सुरैया सहाब ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव के जन्म से लेकरअंत तकअधिकारी हीअधिकार हैं, इन्हींअधिकारों के बीच में जीवन की हर समस्याएं का समाधान इन्हीं के माध्यम से होता रहता है,अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर यह कार्यक्रम हमको यह प्रेरित करता है कि हमअपनी सामाजिक जीवन में इस अधिकार का भरपूर उपयोग करें ताकि हमारी सारी ज्वलंत समस्याओं का समाधान इसके अंतर्गत हो सके।जीवन में कोई ऐसा घड़ी,ऐसा पल नहीं आता है,जहां मानवअधिकार का सहारा नहीं लिया जा सकता है।मानवाधिकार के सहारे ही व्यक्ति,समाज, प्रतिष्ठान,कार्यालय,शिक्षण संस्थाएं,बल्कि जीवन के हर क्षण इसअधिकार केअंतर्गत निहित हैं।मानवाधिकार का अपना एकअलग कार्यशैली है,जिसकेअंतर्गत,गरीब, वंचित,बेरोजगार,विकलांग, बेसहारा,मजदूर,खेतिहर, किसान,पुरुष,महिलाएं

सभी के सभी समस्याओं का निदान इन्हीं के माध्यम से किया जा सकता है।मानवअधिकार का जहां हनन होता हो उसकी सुरक्षा की गारंटी,समस्या का समाधान मानवाधिकार के नियम एवं प्रावधानों केअंतर्गत किया

जा सकता है।

मानवाधिकार से हमारा तात्पर्य उन सभी मूलभूत अधिकारों से है,जो किसी व्यक्ति के जीवन में स्वतंत्रता समानता एवं गरिमा से जुड़े हुए होते हैं,यह जोअधिकार हैं जो प्रत्येक मनुष्य को जन्म से ही शामिल रहता है। यह वर्ग जाति,लिंग,भाषा,निवास स्थान, प्रजाति की सीमाओं से परे है। मानवाधिकार का संरक्षण हमारी शासन व्यवस्था का मूल सिद्धांत रहा है,हमारे संविधान में भी नागरिकों केअधिकारों,मूल अधिकारों के रूप में स्वीकार किया गया है।मानवाधिकार के संरक्षणअधिनियम केअंतर्गत बिहार मानवाधिकारआयोग का गठन 10 दिसंबर 2008 को किया गया है। राज्य सरकार मानवअधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव प्रयासरत एवं दृढ़ संकल्पित है।न्याय के साथ विकास का मूल सिद्धांत मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की इसी मान्यता का मुख्य रूप है।

भारतीय संसद द्वारा वर्ष 1993 से मानवाधिकार संरक्षणअधिनियम पारित किया गया,इसकी धारा 21के अंतर्गत राज्यों में राज्य मानवअधिकारआयोग का गठन किया गया है।इस अधिनियम केअनुरूप बिहार मानवअधिकारआयोग प्रदेश में रहने वाले समस्त निवासियों की सुरक्षा और मानवाधिकार के संरक्षण हेतु लगातार कार्य कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मानवअधिकार दिवस एवं बिहार मानव अधिकारआयोग के 17 में स्थापना दिवस केअवसर पर समस्त निवासियों की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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