शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
जिला के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भाई दूज का पर्व बड़ी धूमधाम से, शांतिपूर्वक ढंग से मनाया गया
भाईदूज का पर्व दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम पर्व है,जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। इस दिन बहने अपनेभाई को तिलक लगाकरआरती उतारती हैं, मिठाई खिलानी हैं। इस पर्व का महत्व यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह त्यौहार राखी के बादआने वाला बेहद विशेष पर्व है,जो भाई-बहन के रिश्तों को नया आयाम देता है,जिसके भीतर प्रेम लगाओ,कभी न टूटने वाला वह रिश्ता है जो गहरे प्रेम भरे बंधन को दर्शाता है, इस दिन को भैयादूज यम दृश्टिया से भी जाना जाता है, इसे भतरू द्वितीय के भी नाम से जाना जाता है। यह पर्व गहरा सांस्कृतिक और धार्मिक
पौराणिक महत्व रखता है। यमराज और उनकी बहन यमुना के बीच प्रेमऔर स्नेह से जुड़ा हुआ है।इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी भक्ति भाव से साथ की जाती है। इस दिन भाई भीअपनी बहन को प्रेम स्वरूप कई तरह के उपहार देते हैं,भाई-बहन के इस पर्व का संबंध यमदेव की पूजा से भी जुड़ा हुआ है।
इस वर्ष भाईदूज केअवसर पर एकअहम योग बन रहा है जो स्वस्थ,दीर्घायु,और हर्ष प्रदान करने वाला माना गया है। जानकारी केअनुसार यह पर्व आयुष्मान योग के प्रभाव से शरीर के ऊर्जा को बढ़ाती है।
भाई दूज केअवसर पर इस बार द्वितीया तिथि गुरुवार रात से ही शुरू होगी,जो शुक्रवार को पूरे दिन रहेगी,लेकिन तिलक करने के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त सुबह 6:26 से लेकर 7.51तक रहेगी। इसके बाद10.39 से 1:27 तक रहेगी,इसके साथ ही शाम 4:16 बजे से रात 8:00 तक भी शुभ मुहूर्त है,जिसमें बहन अपने भाई को तिलक लगा सकती है,हर बहनों को ध्यान रखना चाहिए कि दोपहर 1:30 से 3:00 के बीच राहुल काल रहेगा,इसलिए इस बीच कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है,तोअपने भाई को तिलक लगाने से भी परहेज करें।
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