अंशुल वर्मा
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर गोरखपुर शहर के सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी मोइन खान के जाफरा बाजार स्थित आवास पर एक अंतरराष्ट्रीय कवियों एवं शायरों के साथ काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया |
जिसकी अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय मशहूर शायर मलिक जदा जावेद ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध शायरा डॉक्टर अना देहलवी मौजूद रही।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी के जिला अध्यक्ष सैय्यद इरशाद अहमद,उपाध्यक्ष शकील शाही आदि उपस्थित रहे |
कार्यक्रम के सहसंयोजक मिन्नत गोरखपुरी ने बताया कि बहुत सारे कवि विभिन्न कवि सम्मेलनों एवं मुशायरों में प्रतिभा करने के बाद गोरखपुर से दिल्ली के लिये रवाना हो रहे थे|
उससे पूर्व एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका उद्देश्य था भाषा किसी एक व्यक्ति की नहीं होती बल्कि समाज का आईना होती है |
अध्यक्षता करते हुए मलिक जदा जावेद ने कहा गोरखपुर शहर ने अनेक साहित्यकारों को पैदा किया है जिन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों भाषा में सामान्य रूप से अपनी सेवाएं दी हैं जिसके लिए दुनिया आज भी उन्हें याद करती है |
कार्यक्रम का संचालन मिन्नत गोरखपुरी ने किया |
डॉक्टर दिलशाद गोरखपुरी ने पढ़ा,
जिंदगी की तुम ऐसी धड़कन हो
तुम जो आओ तो मौत टल जाए
डाक्टर अना देहलवी ने पढ़ा,
तुम्हारी यादों के चंद आंसू हमारी आंखों में पल रहे हैं |
न जाने केसे हैं ये मुसाफ़िर न रुक रहे हैं न चल रहे हैं ||
मलिक जदा जावेद ने पढ़ा,
जो दूसरों से गजल काहलवा के लाते हैं|
जु खुली तो तलाफ्यूज से मार खाते हैं ||
डॉक्टर साकिब हारुनी ने पढ़ा,
लफ्जों मनी कभी मजमून में उतर भी करो
तुम दिलो जान मेरे खून में उतर भी करो
इरशाद अजीज ने पढ़ा,
हम अपने गम का तमाशा नहीं करने वाले
तुम्हारा नाम का चर्चा नहीं करने वाले
दुबई के मेहमान शायर जावेद नियाजी ने पढ़ा,
तन्हाइयों में अक्सर हमने यही किया है
तस्वीर एक बनाकर तेरा नाम लिख दिया है |
साथ ही साथ आसिफ सफी (कानपुर),आशिक रायबरेली , इब्राहिम अली आदि ने काव्य पाठ किया|
इस मौक पर कार्यक्रम के संयोजक मोइन खान ने तमाम मेहमानों का शुक्रिया अदा किया |
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