ब्यूरो चीफ़ हफ़ीज अहमद खान
कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश।
भारतीय बाल रोग अकादमी की कानपुर शाखा द्वारा विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर होटल रॉयल क्लिफ में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ क्षितिज बंसल ने बताया कि ऑटिज्म न्यूरो- विकास से संबंधित एक विकलांगता है जो बच्चे की सोशल, कम्युनिकेशन एवं बिहेवियर स्किल्स को कई तरह से प्रभावित करता है।विश्व में 160 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होता है। बच्चों में 2 से 3 वर्ष की आयु में ही ऑटिज्म के लक्षण मिलना प्रारंभ हो जाते हैं जैसे-अपने में ही खोया रहना एवं गुमसुम रहना, आंखों में आंख डाल कर बात नहीं करना, अपना नाम पुकारे जाने पर कोई प्रतिक्रिया ना देना, बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं लेना, कोई नया बदलाव पसंद ना करना, एक ही काम को बार-बार करते रहना इत्यादि। आई ए पी सचिव डॉ अरुण कुमार आर्य ने बताया के विश्व में लगभग 7 करोड एवं भारत में एक करोड़ लोग ऑटिज्म से प्रभावित है। आई ए पी अध्यक्ष डॉ विवेक सक्सेना ने बताया की ऑटिज्म के संबंध में डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ एवं समाज में जागरूकता की भारी कमी है जिससे सभी मामले सही समय पर सामने नहीं आ पाते और प्राय: उचित उपचार नहीं मिल पाता। कार्यक्रम में डॉ देवेंद्र अवस्थी, डॉ वी एन त्रिपाठी एवं बड़ी संख्या में अन्य बाल रोग विशेषज्ञ एवं जूनियर डॉक्टर उपस्थित रहे।खलासी लाइन स्थित पुष्पा खन्ना मेमोरियल स्कूल में भी आईएपी कानपुर द्वारा ऑटिज्म प्रभावित बच्चों एवं उनके अभिभावकों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ऑटिज्म प्रभावित बच्चों के लिए एक पेंटिंग कंपटीशन का भी आयोजन किया गया और विजेता छात्रों को आईएपी पदाधिकारियों द्वारा पुरस्कार वितरित किए गए ।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आईएपी अध्यक्ष डॉ विवेक सक्सेना, सचिव डॉ अरुण कुमार आर्य, डॉक्टर देवेंद्र अवस्थी, डॉ क्षितिज बंसल एवं प्रधानाचार्य रूमा चतुर्वेदी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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