डायबिटीज और हेरिडिटी: जानिए पेरेंट्स को डायबिटीज होने पर बच्चों में कितना बढ़ जाता है।
ब्यूरो चीफ़ हफ़ीज अहमद खान
कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश।
हमारे देश के हजारों बच्चे इस लर्निंग डिसेबिलिटी की समस्या का सामना कर रहे हैं। जब भी कोई बच्चा लिखने,पढ़ने, बोलने और समझने में दिक्कत का सामना कर रहा है, तो ये लर्निंग डिसेबिलिटी के संकेत हो सकता है। लार्निंग डिसेबिलिटी एक मेंटल डिसऑर्डर है, जो अक्सर बच्चों में देखने को मिलता है। सीखना एक सतत प्रक्रिया है लेकिन, अगर कुछ सीखेन में जरूरत से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसे हल्के में न लें। ये लर्निंग डिसेबिलिटी के संकेत हो सकते हैं। भारत में ऐसे बहुत-से मां बाप हैं, जो अपने बच्चे की इस समस्या का निदान समय रहते नहीं कर पाते और न ही वो इस बीमारी को ही समझ पाते हैं।
इस स्थिति की शुरुआत में बच्चे को बोलने में लिखने में पढ़ने में, सुनने में, शब्दों के उच्चारण में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। सीखने में उसका मन नहीं लगता और वह चीजों से जी चुराने या उनसे भागने की कोशिश करता है। इस विकार में न्यूरोलॉजिकल भिन्नता मुख्य कारण होती है। दिमाग किसी भी सूचना के सर्केत को सही ढंग से पासऑन और रिसीव नहीं कर पाता, जिसके कारण बच्चे को सीखने में समस्या होती है। सिर में चोट या किसी दिमागी बिमारी के कारण भी बच्चें को लर्निंग डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है। अनबॉर्न बेबी का दिमागी रूप पूर्ण रूप से विकसित न होने के कारण भी ये समस्या हो सकती है।
ऐसे में आपको सतर्क हो जाना चाहिए और जरूरी ट्रीटमेंट कराना चाहिए। नीचे जानिए कि अगर बच्चे को लर्निंग डिसेबिलिटी की समस्या होती है, तो किस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इस समस्या के दौरान बच्चे को पढ़ते समय दिक्कत होने लगती है। यही नहीं, अगर बच्चा पढ़ने की कोशिश भी करता है तो वो बहुत ही धीमी गति से पढ़ पाता है। सामान्य बच्चों की तरह वो सामान्य तरीके से नहीं पढ़ पाता। इस समस्या के दौरान बच्चे को लिखते समय बहुत दिक्कत होने लगती है। वो ठीक से नहीं लिख पाने में असमर्थ होता है!इस समस्या से पीड़ित बच्चे एकेडमिक्स में पीछे होते हैं। स्कूल जाते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल में सिखाई जाने वाली चीजें जल्दी समझ नहीं आती है।
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