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सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का हुआ समापन।

परिवहन मंत्री सभी के लिए भिजवाएंगे एक लोटा गंगा जल।

श्रद्धालुओं ने नम आंखों से दी बाबा की बिदाई, गूंजा स्वर बाबा अभी न जाओ छोड़कर।

भक्ति से ही मिलती है संसार की मुक्ति: पंडित प्रदीप मिश्रा जी

धनंजय कुमार शर्मा

बलिया: उत्तर प्रदेश।

बाबा बालखंडी नाथ धाम, दिउली में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का रविवार को भव्य समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संसार रूपी भवसागर से पार होने का मार्ग केवल शिव भक्ति है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जेब में रखा धन किसी भी यात्रा को सुगम बना देता है, उसी प्रकार हृदय में भगवान शिव का वास जीवन की यात्रा को सफल बनाते हुए मनुष्य को मुक्ति प्रदान करता है। समापन अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा का आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की कि अधिक मास वर्ष 2029 में एक बार फिर उनके श्रीमुख से शिव महापुराण कथा का आयोजन कराया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद, मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, वाराणसी से पधारे जगद्गुरु 1008 सतुआ बाबा तथा जिला सहकारी बैंक उन्नाव के चेयरमैन अरुण सिंह का अभिनंदन किया। साथ ही कथा के लिए पंजीकरण कराने वाले श्रद्धालुओं के घर निःशुल्क एक लोटा जल पहुंचाने की घोषणा भी की। कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान कार्तिकेय के श्रीशैलम पर्वत की यात्रा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वन, पक्षियों और पशुओं के माध्यम से उन्हें सृष्टि के प्रत्येक कण में ईश्वर की उपस्थिति का बोध हुआ। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मानव जीवन ही ऐसा है, जो भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने की क्षमता रखता है। सोशल मीडिया पर भृगु ऋषि की जन्मभूमि को लेकर उठे सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य के चार जन्म होते हैं और साधना एवं तपस्या से प्राप्त सिद्धि भी एक जन्म के समान है। इसी कारण भृगु ऋषि ने जिस भूमि पर तपस्या कर सिद्धि प्राप्त की, वह भूमि उनके लिए जन्मभूमि के समान मानी जाती है। इस आधार पर बलिया को भृगु ऋषि की जन्मभूमि बताया गया है। उन्होंने सात संख्या के महत्व को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि सप्ताह के सात दिन, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सात दिनों तक गोवर्धन धारण करने तथा धार्मिक कथाओं के सात दिवसीय स्वरूप के पीछे आध्यात्मिक महत्व निहित है। उन्होंने कहा कि भगवान को पूर्ण समर्पण प्रिय है और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा को ईश्वर पूर्ण रूप से स्वीकार करते हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने राजा दक्ष और नारद जी के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान का अपमान करने या उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास करने वालों को उसका परिणाम अवश्य भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जीवन की कठिनाइयों से भरे इस संसार में वही व्यक्ति सुरक्षित रहता है, जो भक्ति रूपी तैरना जानता है। जिस प्रकार तैराक जल में डूबता नहीं, उसी प्रकार शिव भक्त संसार रूपी भवसागर से पार हो जाता है। कथा के विश्राम से पूर्व उन्होंने चंचूला के पति बिन्दुक की मुक्ति, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य और उनके नामकरण का संक्षिप्त वर्णन किया। भगवान शिव की आरती के साथ अधिक मास शिव महापुराण कथा का विधिवत समापन हुआ। सात दिनों तक चली कथा में लाखों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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