जमुई के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के एक नए अध्याय की शुरुआत।
मोहम्मद ग़ुलाम सरवर
जमुई, बिहार।
जमुई: जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक रहे 'रावणेश्वर हॉल' का जीर्णोद्धार होने के बाद आज माननीय उद्योग मंत्री, बिहार सरकार, सुश्री श्रेयसी सिंह द्वारा इसका विधिवत उद्घाटन किया गया। यह क्षण जमुई जिले के इतिहास और इसके सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। वर्ष 1939 में स्थापित यह ऐतिहासिक हॉल केवल एक भवन मात्र नहीं है, बल्कि यह जमुई के सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्शों को गति देने का मुख्य केंद्र रहा है। लंबे समय से जमुई के इस बौद्धिक विरासत का प्रतीक रहा इस धरोहर की जर्जर स्थिति चिंता का विषय बनी हुई थी, जिसका अब जिला प्रशासन के द्वारा जीर्णोद्धार कर पूरी तरह कायाकल्प कर दिया गया है।
उद्घाटन समारोह के इस अवसर पर संबोधित करते हुए माननीय उद्योग मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि अपने पूर्वज के नाम पर बने में इस अमूल्य धरोहर की दयनीय स्थिति को देखकर मन में गहरी पीड़ा होती थी। इसीलिए एक तरफ अपने पारिवारिक धरोहर और जमुई के इस बौद्धिक विरासत के केंद्र को पुनर्जीवित करने की एक छटपटाहट हमेशा मन में रहती थी माननीय मंत्री ने जिला पदाधिकारी के कुशल नेतृत्व और अथक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज यह हॉल अपने इस रूप में हमारे सामने है। उन्होंने आगे की रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले समय में इस परिसर के सौंदर्यीकरण का काम और तेजी से किया जाएगा, साथ ही युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए स्थानीय स्टेडियम और खेल के मैदानों की मरम्मत भी कराई जाएगी। उन्होंने दृढ़ता से दोहराया कि जमुई को खेल और उद्योग के मानचित्र पर अग्रणी बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि यहाँ के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देकर पलायन की गंभीर समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे जमुई के जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय से जिले में एक सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक सांस्कृतिक केंद्र की कमी महसूस की जा रही थी, जो इस हॉल के पुनरुद्धार के साथ पूरी हो गई है। विकास के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या क्षेत्र के समग्र विकास के लिए केवल भौतिक या बुनियादी ढांचा तैयार करना काफी नहीं होता, बल्कि विकास की समग्रता तब तक अधूरी है जब तक कि वहाँ के नागरिकों में बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना का विकास न हो। जिला पदाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि इस परिसर के वातावरण को सदैव जीवंत बनाए रखने और स्थानीय कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने के लिए अब से प्रत्येक शनिवार या रविवार को यहाँ नियमित रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन जिला प्रशासन द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जमुई को उसका पुराना सांस्कृतिक गौरव वापस लौटाया जा सके।
इस ऐतिहासिक उद्घाटन समारोह में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन के पदाधिकारियों, स्थानीय साहित्यकारों, रंगकर्मियों, बुद्धिजीवियों और भारी संख्या में आम नागरिकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और जिला प्रशासन के इस सराहनीय कदम का स्वागत किया।
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