शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
डिजिटल युग में बिहार पुलिस का एकआधुनिक कदम उठाया गया है,जिससे अपराधियों के डिजिटल फिंगरप्रिंट मिलान (NAFIS) ऑनलाइन साक्ष्य जुटाया जास केगा।संवाददाता को इस बात की जानकारी, (E-Sakshya),एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ ने देकर बताया किअगले 5-6 महीनों मेंअपराध अनुसंधान पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा,इस संबंध में वर्ष 2018 अफसरों को एक विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई है।बिहार मेंअपराधियों पर नकेल कसने,आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए पुलिस अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। संवाददाता को इस बात की जानकारी,पटना के सरदार पटेल भवन मेंआयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान एडीजी (सीआईडी),पारसनाथ ने देते हुए बताया अगले 5 से 6 महीनों के भीतर राज्य में अपराध अनुसंधान की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल करने की योजना है। इस नई व्यवस्था के तहत मामलों की ऑनलाइन मॉनीटरिंग करने, डेटाअपडेट रखने और जांच में अलग-अलग डिजिटल टूल्स व मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारीअंतिम चरण में है।वैज्ञानिक,डिजिटल अनुसंधान के लिए 2018 पुलिसअफसरों को ट्रेनिंग मिल चुकी है। अपराधियों को समय पर सजा दिलाने के लिए वैज्ञानिक,तकनीकी साक्ष्यों का सही संकलन बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सीआईडी द्वारा पुलिस पदाधिकारियों के लिए 12 दिवसीय एक विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एडीजी ने आगे बताया कि पिछले वर्ष से लेकरअब तक कुल 6 बैचों में 2018 पुलिस अधिकारियों को डिजिटल, वैज्ञानिकअनुसंधान के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा चुका है,ताकि जमीनी स्तर पर जांचअधिकारी इन एडवांस तकनीकों का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल कर सकें। सीसीटीएनएस पोर्टल से जुड़े 968 थाने जो अब ऑनलाइन केस डायरी व एफआईआर को देखा जा सकता है। राज्य में मामलों की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सीसीटीएनएस का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में बिहार के 968 थाने इस सिस्टम से पूरी तरह जुड़ चुके हैं,जल्द ही शेष बचे थानों को भी इससे जोड़ दिया जाएगा।इस सिस्टम की बदौलत अब एफआईआर, केस डायरी,चार्जशीट, फाइनल फॉर्म जैसी महत्वपूर्ण विवरणी ऑनलाइन देखी जा सकती है।आंकड़ों के मुताबिक, सीसीटीएनएस पोर्टल पर केस डायरी एंट्री की संख्या 1 लाख 14 हजार 552 तक पहुंच गई है,जो जांच की तेज रफ्तार को दर्शाती है।
ई-साक्ष्य' और 'नफीस' जैसे अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल्स सेअपराधियों पर कसेगा शिकंजा अपराध अनुसंधान को सशक्त बनाने के लिए पुलिस कई अन्य महत्वपूर्ण केंद्रीय पोर्टल्स का भी उपयोग कर रही है,इसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 'ई-साक्ष्य' पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर अब तक 68 हजार सेअधिक केसों के दस्तावेज अपलोड किए जा चुके हैं। इसकेअलावाअपराधियों के फिंगरप्रिंट का डिजिटल मिलान करने के लिए एनएएफआईएस (NAFIS) प्रणाली,जेल प्रबंधन के लिए 'ई-प्रिजन',गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए 'मिशन वात्सल्य'और कोर्ट,पुलिस व एफएसएल के बीच बेहतर तालमेल के लिए भी आईसीजेएस (ICJS) पोर्टल का सक्रियता से उपयोग किया जा रहा है।
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