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इस्लाहे मआशरा की कारगर हो रही मुहिम।

सादगी के साथ मस्जिद में हुआ शरई निकाह।

वसीम अकरम कुरैशी

जयपुर. राजस्थान।

राजस्थान के कुरैशी समाज में दहेज के लेन-देन पर पाबंदी लग रही है। समाज के वरिष्ठजन एवं नामवर लोग अपने लड़के-लड़कियों की शादी में दहेज का लेन-देन बंद कर एक मिसाल कायम कर रहे है। इस मुहिम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं बिजनेसमैन झोटवाड़ा निवासी छुट्टन कुरैशी ने अपनी बेटी आलिमा की नो गार्डन, नो डिनर, नो दहेज के पैटर्न पर शादी कर एक मिसाल कायम की। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एमडी रोड की इस्लाहे मआशरा कमेटी ने सादगी के साथ निकाह के कई आयोजन मस्जिद में कराए। इस्लाहे मआशरा कमेटी के पदाधिकारी ऐसे आयोजनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।

दहेज के बिना लेन-देन की इसी कड़ी में सोमवार, 30 मार्च को पेंटर कॉलोनी, नाहरी का नाका की नूरानी मस्जिद में शहजाद अहमद कुरैशी ने अपनी पुत्री अलवीरा कुरैशी का निकाह मुन्नादीन के पुत्र फैजान कुरैशी के साथ सादगी से संपन्न कराया। मुफ्ती अबरार अहमद साहब ने निकाह पढ़ाया। शरीयत के अनुसार निकाह की रस्म अदायगी के बाद सभी आगंतुकों को खिजूर पेश कर अगवानी की गई। इस मौके पर बिरादरी के वरिष्ठ जन एवं बड़ी संख्या में समाजसेवी शामिल हुए। शहजाद अहमद कुरैशी, अशोक शर्मा, इफ्तिखार अहमद एवं परिजनों ने सभी आगंतुकों की मेहमान नवाजी की। सभी आगंतुकों को खिजूर व शरबत पेश कर दुल्हन की रुखसती घर से की गई।

फिजूल खर्ची पर लगे पाबंदी, शिक्षा पर करें खर्च : कुरैशी

इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी एवं ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश यूथ विंग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान कुरैशी ने कहा कि समाज में बढ़ती सामाजिक कुरीतियों के कारण बहुत सारी बच्चियों की शादी समय पर नहीं होने के कारण उनके घर वाले बड़े परेशान रहते हैं तथा कर्ज लेकर शादियां करते हैं, जो कि जीवन भर कर्ज के बोझ से दबे रहते हैं। समाज के वरिष्ठ जनों को चाहिए कि वे आगे आकर ऐसी पहल करें और फिजूल खर्ची पर पाबंदी लगाते हुए बच्चों की शिक्षा पर खर्च करें तथा शादियों में शरई तरीका अपनाते हुए नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर की नीति पर कार्य करें।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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