ब्यूरो चीफ सैय्यद अनवर कादरी
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र।
जिले में पशुधन के उचित प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और खरीद-बिक्री प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पशुधन का टैगिंग अनिवार्य किया गया है। जिलाधिकारी दिलीप स्वामी ने बताया कि सरकारी नियमों के अनुसार किसानों और पशुपालकों के नाम पर पशुधन का पंजीकरण और टैगिंग होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों से जिले में आने वाले कई पशुओं पर टैगिंग नहीं होती, जिससे खरीद-बिक्री में पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है। इस स्थिति को सुधारने के लिए जिले में आने वाले सभी पशुधन का टैगिंग और पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि पशुसंवर्धन विभाग, पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग मिलकर पशुओं के परिवहन और बाजार में खरीद-बिक्री के दौरान जांच करें। व्यापारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गाय, बैल, बकरी और भैंस जैसे पशुओं के कान में टैग (बिल्ला/चिह्न) हो और उससे संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हों।
गर्मी के मौसम को देखते हुए पशुधन की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं। पशुसंवर्धन विभाग को टीकाकरण, चारे की उपलब्धता और पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही किसानों को उष्माघात (हीट स्ट्रोक) से बचाव के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी स्वामी ने 29 मार्च तक जिले में पशुधन टीकाकरण लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। जिला पशुसंवर्धन उपआयुक्त नानासाहेब कदम के अनुसार, लम्पी/लाल-खुरपका रोग (एफएमडी) से बचाव के लिए चल रही टीकाकरण मुहिम में अब तक 57% लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
प्रशासन ने सभी पशुपालकों और व्यापारियों से नियमों का पालन करने और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
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