शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
पश्चिम चंपारण,पूर्वी चंपारण के कुछ भागों में होने वाला सुगंधित एवं मीठा जर्दाआम
आज भी जीआई टैगिंग होने की राह देख रहा है,मगर जिला के नेटिव मर्चा धान का
पूर्व के जिला पदाधिकारी के प्रयास से जीआई टैगिंग हो गया है,इसके कारण चंपारण के किसानों को ढाईगुना लाभ प्राप्त हो रहा है। मगर इस जिला का स्वादिष्ट,सुगंधित मीठा जर्दाआम का अपनी विशेषता रखते हुए भी इससे वंचित है,इसका जीआई टैगिंग नहीं होना दुखद है।
ऐसे में जिला में जर्दाआम पैदावार करने वाले किसानों को उनकेअधिक लाभ होने से वंचित होना पड़ रहा है।
वर्षों से जिला में चर्चा होती रहती है कि यहां के पैदावार जर्दाआम की आपूर्ति दूसरे राज्यों में हर वर्ष होती है, जिससे कई गुना लाभ प्राप्त होता है।इसआम की विशेषता यह है कि यह बहुत ही सुगंधित,स्वादिष्ट और मीठा होता है,स्वाद ऐसा है कि खाने वाला कईआम बैठे-बैठे खा जाते हैं,इसी आम पर आम खाने के प्रतियोगिता भी हर साल आयोजित की जाती है, जिसमें कई प्रतिभागी भाग लेते हैं,उनको प्रथम,द्वितीय, तृतीय श्रेणी में चयनित किया जाता है,जिन्हें सम्मानित भी किया जाता है। वैज्ञानिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसआम की विशेषता यहां की जलवायु और उपजाऊ मिट्टी जर्दा आम की पैदावार के लिए बहुत ही अनुकूल है।
यही कारण है कि दोनों चंपारण के कई प्रखंडों में इस विशेषआम की पैदावार अधिक होती है।इतना होने की बावजूद भी इसआम की गुणवत्ता,स्वाद,खुशबू,मीठा होने के बाद भी इसका जीआई टैगिंग नहीं होने पर,
स्थानीय मानवअधिकार -सह - सामाजिक कार्यकर्ता,सुरैया शाहाब ने जनहित में जिला प्रशासन से मांग की है कि अभिलंब भी बिना देर किए इस विशेष जर्दाआम का जीआई टैगिंग कराने की दिशा मेंअग्रतर कार्रवाई की जाए,ताकि इस जिला के इस जर्दाआम का पैदावार करने वाले किसानों कोअधिक लाभ मिल सके,इनको किसी तरह से चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़े।
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