अनवर कादरी
छत्रपती संभाजीनगर, औरंगाबाद, महाराष्ट्र।
स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल इकोनॉमिक रिसर्च एंड नेशनल इंटीग्रेशन की ओर से प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. राम पुनिया का व्याख्यान स्वामी रामानंद तीर्थ सभागृह, नागेश्वरवाड़ी, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र में आयोजित किया गया।
अपने व्याख्यान में डॉ. राम पुनिया ने भारत की गुलामी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की गुलामी धर्म के आधार पर शुरू हुई और अंग्रेजों ने ही देश को वास्तविक रूप से गुलाम बनाया। उन्होंने बताया कि अंग्रेज भारत की अपार संपत्ति लूटकर अपने देश ले गए। रेल्वे, पोस्ट, टेलीफोन, जेल, आधुनिक शिक्षा प्रणाली और न्याय व्यवस्था जैसी व्यवस्थाएं अंग्रेजों द्वारा अपने शासन को मजबूत करने के लिए लागू की गई थीं, न कि भारतीयों के कल्याण के लिए।
लोकतंत्र के विकास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग, मजदूर वर्ग और शिक्षित वर्ग के संघर्ष से लोकतंत्र का उदय हुआ, जबकि राजा, नवाब और जमींदार जैसे शासक वर्ग धीरे-धीरे कमजोर होते चले गए।
डॉ. पुनिया ने महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख के सामाजिक व शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में परिवर्तन की शुरुआत होई
उन्होंने ‘छावा’ फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास को प्रस्तुत करते समय तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। छत्रपति संभाजी महाराज के संदर्भ में उन्होंने बताया कि संभाजी महाराज ने लगभग 18 वर्षों तक मुगल बादशाह औरंगजेब के साथ सेनापती बन कर दो राजा ओं के खिलाफ युद्ध लड़े। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संभाजी महाराज के पुत्र का बचपन बादशाह के दरबार में बीता था और बड़े होने के बाद उन्होंने औरंगजेब की कब्र पर जाकर दर्शन किए थे।
व्याख्यान के अंत में डॉ. पुनिया ने कहा कि संविधान को सर्वोपरि रखकर देशहित में कार्य करना आवश्यक है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, शहीद भगत सिंह और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की सोच और दूरदृष्टि के कारण ही भारत आगे बढ़ सका है।
इस व्याख्यान मे विशेष रूप से डॉ मंगल खिवंसरा और डॉ सुभाष लोमटे उपस्थित रहे।
© Copyright All rights reserved by India Khabar 2026