सेराज अहमद कुरैशी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
एम. ए. एकेडमी तुर्कमानपुर में हर साल की तरह इस साल भी आज़ाद भारत के प्रथम शिक्षा मन्त्री व भारत रत्न से सम्मानित मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्मदिवस बहुत ही धूम धाम से मनाया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में सबसे पहले नसीम अशरफ फारूकी ने कुरान की तिलावत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. इकबाल फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद राफे ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यह भारतीयों के लिए गर्व का विषय है कि हमारे मुल्क को शिक्षा जगत में एसे महान लोग मिल चुके हैं जिन्होंने शिक्षा जगत में बहुत सारे योगदान दिए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोरखपुर शहर के वरिष्ठ समाजसेवी वाटर मैन हाजी जलालुद्दीन कादरी ने कहा कि मौलाना आज़ाद ने अपने मुल्क में लोगों को सिर्फ इंसानियत की सीख दी।
कार्यक्रम का सफल संचालन एम. ए. एकेडमी के निदेशक डॉ. मोहम्मद आकिब अन्सारी ने करते हुए बताया कि मौलाना आज़ाद भी गांधीजी के सिद्धांतों का समर्थन करते थे।
उन्होंने 1947 में ज़ामा मस्ज़िद दिल्ली से जनता को सम्बोधित करते हुए कहा था कि "आओ अहद करो कि ये मुल्क हमारा है. हम इसी के लिए हैं और उसकी तक़दीर के बुनियादी फैसले हमारी आवाज़ के बगैर अधूरे ही रहेंगे. आज ज़लज़लों से डरते हो ? कभी तुम ख़ुद एक ज़लज़ला थे. आज अंधेरे से कांपते हो ? क्या याद नहीं रहा कि तुम्हारा वजूद ख़ुद एक उजाला था. ये ईमान से भटकने की ही बात है जो शहंशाहों के गिरेबानों से खेलने वाले आज खुद अपने ही गिरेबान के तार बेच रहे हैं. और ख़ुदा से उस दर्जे तक गाफ़िल हो गये हैं कि जैसे उस पर कभी ईमान ही नहीं था."
इस अवसर पर प्रधानाचार्या सीमा परवीन, उप प्रधानाचार्या निदा फातमा, सूबिया खान, शमा खान आदि लोगों के साथ सभी बच्चे उपस्थित थे।
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