नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों के लिए दर्स-ए-कुरआन की शुरूआत।
सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (सबक/शिक्षा) की शुरूआत की गई। यहां कुरआन-ए-पाक की शिक्षा प्रत्येक रविवार को दोपहर साढ़े तीन बजे से दी जाएगी। वहीं मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में भी कुरआन-ए-पाक का दर्स दिया गया। यूपी बोर्ड की दसवीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाली हफ्सा अली व सदफ फातिमा को सम्मानित किया गया।
दर्स की शुरूआत करते हुए शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि कुरआन-ए-पाक का दर्स (सबक/शिक्षा) मूल रूप से कुरआन की आयतों को पढ़ने, उनके अर्थ को समझने और उन पर चिंतन करने की प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य अल्लाह के संदेश को जानकर उसे अपने जीवन में उतारना है। कुरआन इंसानी जिंदगी के तमाम मामलों में मार्गदर्शन करने वाली आखिरी किताब है। यह इंसान के चरित्र का सुधार करती है और उसे आध्यात्मिक तौर पर पवित्र बनाती है। दर्स का एक बड़ा मकसद लोगों को अरबी भाषा न आने के बावजूद उर्दू व हिंदी में अल्लाह का संदेश पहुंचाना है।
दर्स संचालक हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि कुरआन-ए-पाक का शिक्षा इंसान के लिए अल्लाह का संदेश है जो ईमान, नैतिकता, न्याय और समानता पर जोर देती है। यह कुरआन-ए-पाक के अर्थ, व्याख्या और मानव जीवन के लिए इसके मार्गदर्शन को समझने का एक प्रयास है। दर्स न केवल पढ़ने, बल्कि इसे समझने और जीवन में उतारने के लिए होता है।
संयोजक कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी व आसिफ महमूद ने कहा कि कुरआन-ए-पाक का दर्स हमें आत्म-सुधार, सामाजिक जिम्मेदारी, नमाज, जकात, और तौहीद के माध्यम से अल्लाह की इबादत सिखाता है। दर्स में कुरआन का गहरा अध्ययन व्याख्या के साथ किया जाता है ताकि आयतों का सही अर्थ समझा जा सके। दर्स व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक रिश्ते, और सामाजिक आचरण के लिए सीधे और व्यावहारिक नियम प्रदान करता है।
अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व शांति की दुआ मांगी गई। दर्स में शीरीन आसिफ, आयशा खातून, सैयदा यासमीन, नाजिया खातून, ज्या वारसी, शिफा खातून, सना फातिमा, फिजा खातून, शालिबा, मुबस्सिरा, आस्मा खातून, नूरजहां, फिजा खातून, सानिया, अदीबा, गुलफिशा सहित तमाम इस्लामी बहनों की सहभागिता रही।
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