एतिकाफ में बैठे बच्चों का हुआ सम्मान, 29वां रोजा मुकम्मल ।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

माह-ए-रमजान का 29वां रोजा पूरा हो गया। रोजेदारों ने रोजा, नमाज, सदका व खैरात के जरिए अल्लाह तआला को राजी करने की भरपूर कोशिश की। रोजेदारों ने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोजा खोला। मुल्क में अमन ओ सलामती और भाईचारे की दुआ मांगी। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दस दिनों के एतिकाफ में बैठे बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए महफिल सजी। महफिल में मुहम्मद जैद, मुहम्मद आसिफ रजा, मुहम्मद रूशान, अहमद रजा, मुहम्मद आकिब अंसारी, मुहम्मद शाद, मुहम्मद अशफ, मुहम्मद सफियान, अब्दुस्समद, अली हम्जा, मुहम्मद सलीम, रहमत अली आदि बच्चों को शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने सम्मानित किया। तोहफा दिया गया। एतिकाफ में बैठे अस्सी वर्षीय हाजी रफीउल्लाह को भी सम्मानित किया गया। महफिल में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, हाफिज आमिर हुसैन निजामी, सैयद अली सब्जपोश, अली अफसर, उबैद रजा, गजाली आदि शामिल हुए।

मस्जिद के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने ईद के दिन के आदाब बताए। मिस्वाक करना। गुस्ल करना। साफ सुथरा लिबास पहनना। अगर नया मयस्सर हो तो नया कपड़ा पहनना। खुशबू लगाना। नमाजे ईद से पहले सदका-ए-फित्र अदा करना। अगर मुमकिन हो तो पैदल ईदगाह जाना। एक रास्ते से जाना दूसरे से वापिस आना। ईदगाह जाने से पहले ताक अदद खजूरें, छुआरे या कोई और मीठी चीज जो मयस्सर हो खाना। निगाह नीचे किए बाअदब और पुरवकार तरीके से ईदगाह जाना। ईद-उल-फित्र में ईदगाह तकबीरे तशरीक आहिस्ता पढ़ते हुए जाना। ईद की नमाज खुले मैदान या ईदगाह में पढ़ना। ईद के दिन अपने आस पड़ोस के गुरबा मसाकीन का खुसूसी ख्याल रखना। जरूरतमंदों की मदद करना। नमाजे पंजगाना की खास तौर पर पाबंदी करना। और तमाम तरह के गुनाहों से बचना और नेकी के कामों में ये दिन गुजारना।

ईदगाह में ईद की नमाज अदा करना पैगंबर-ए-इस्लाम की सुन्नत - मौलाना गुलाम हुसैन 

मरकजी नूरी जामा मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन के इमाम मौलाना गुलाम हुसैन आजीजी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 53 साल की उम्र में मक्का से हिजरत करके मदीना आ गये तो दो हिजरी को रोजा फर्ज हुआ। कुरआन शरीफ के दूसरे पारे में ईद की खुशी मनाने का हुक्म नाजिल हुआ। पैगंबर-ए-इस्लाम आबादी से दूर अपने सहाबा के साथ ईद की नमाज अदा की। ईदगाह में ईद की नमाज अदा करना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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