पर्व पर जश्न का माहौल।
शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
ईसाई समुदाय का महान पर्व क्रिसमस अर्थात बड़ा दिन विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बड़ी धूमधाम,रंगारंग कार्यक्रम केआयोजन,गिरजा घर में ईश्वर की प्रार्थना के साथ संपन्न होगा।इसअवसर पर ईसाई समुदाय के पुरुष, महिलाएं,बच्चे रंग-बिरंगे कपड़ों में सजधज कर,ईश्वर के प्रार्थना के लिए गिरजाघर में जा रहे हैं। गिरजाघर को अतिअत्यधुनिक ढंग से सुसज्जित किया गया है,जो बहुत हीआकर्षण का केंद्र बना हुआ है।इसअवसर पर केरॉल के गाने,केक की खुशबू,रंग बिरंगी सजावट, मकान और दुकानों की सुंदरता देखने को मिल रही है
पूरे गिरजाघर को बड़ी आकर्षक ढंग से सजावट करके लाइटनिंग,साउंड म्यूजिक से लोगों को आकर्षित करने के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया गया है।गिरजा घर में प्रार्थना करने के लिए ईसाई समुदाय के लोगअपनी पूरी भावना भक्ति से,श्रद्धा पूर्वक मनाकर प्रफुल्लित हो रहे हैं। प्रार्थना के सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लोग एक दूसरे को गले मिलने,बधाई,शुभकामनाएं देने की परंपरा को दिल से निभा रहे हैं।इस अवसर पर गिरजाघर में प्रार्थना और इबादत करने हेतुअपार भीड़ जमा हो गई है।ईश्वर की प्रार्थना में सम्मिलित ईसाई समुदाय के सभी वर्ग के लोग शामिल हैं।गिरजाघर में प्रार्थना में उपस्थित ईसाई समुदाय के सभी लोग शांति, सद्भाव,प्रेम,स्नेह,भाईचारा का
संदेश के साथ देश में अमन चैन,खुशहाली,देश का संपूर्ण विकास हेतु प्रार्थना किया गया
गिरजाघर में प्रार्थना के समय बिल्कुल खामोशी छाई रही, सभी ईश्वर की प्रार्थना में लीन नजर आए।ईसाई समुदाय के लोगों में इस पर्व की महानता,
जिज्ञासा,विशेषता,महत्ता को देखते हुए पूर्व मनाने की खुशी
मैं चार चांद लगा देती है। यह पर्व प्रति वर्ष 24/25 दिसंबर को निश्चित रूप से ही मनाई जाती है,इसमें कोई उलटफेर नहीं होता है,इसका समय सीमा निर्धारित है,इसी समय सीमा के अंतर्गत ईसाई समुदाय के लोग गिरजाघर में अपनी प्रार्थना को बड़े ही शांतिपूर्वक ढंग,ईश्वर में लीन होकर सेअंजाम देते हैं।ईसाई समुदाय की यह सबसे बड़ा पूर्व माना जाता है,वैसे तोऔर भी कई पर्व है,लेकिन इसकी महत्व बहुत हीअधिक है।इस अवसर पर ईसाई समुदाय के सभी लोग जो विभिन्न राज्यों, देशों में रहकर अपनी ड्यूटी को अंजाम देते हैं,वह भी इस अवसर परअपने-अपने घर आकर अपने-अपने गिरजा घरों में प्रार्थना में सम्मिलित हो जाते हैं।ईसाई समुदाय के लोग इस पर्व की समाप्ति के बाद अपने परिवारजनों के लड़के/लड़कियों की शादी विवाह,एवंअन्य कार्यक्रम इसीअवसर पर करते हैं, क्योंकि बहुत कम समय के लिए वह अपने-अपने ड्यूटी को छोड़करआते हैं,फिर उन्हें लौटना भी पड़ता है,इसलिए सारे कार्यक्रम इसीअवधि में कर लेना मुनासिब समझते हैं, इस अवसर पर आने से प्रार्थना में भी सम्मिलित हो जाते हैं,परिवार के सभी लोगों से,इष्टमित्र,सगे संबंधियों से मुलाकात भी हो जाती है, वार्तालाप भी हो जाता है, समस्याओं का समाधान भी हो जाता है,क्योंकि,पुनः1वर्ष बाद ही फिरआने का मौका मिलता है।
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