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नहाए खाए के साथ ही चार दिनों का लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

विगत वर्षों के भांति इस वर्ष भी लोकआस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ नहाए खाए के साथ शुरू हो गया। यह पर्व सबसे बड़ा, अनुशासित,धार्मिक पर्व माना जाता है। छठ की शुरुआत कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थ तिथि से शुरू होता है छठवर्ती गंगा स्नान करने के बाद चावल,चना का दाल और कद्दू की सब्जी खाते हैं,और यही चीज प्रसाद के रूप में वितरित की जाती हैं। नहाए खाए के दिन से छठ पर्व को लेकर विशेष साफ सफाई का ध्यान रखा जाता है,छठब्रती विशेष रूप से साफ सफाई काध्यान रखते हुए भोजन तैयार करती हैं। छठ केअगले दिनवृत्ति खड़ना करते हैं, खड़ना के दिन छठवरति को दिनभर निर्जला उपवास करना होता है,फिर शाम से पूजा अर्चना करने के बाद एक कमरे में बंद होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं,फिर वही प्रसाद लोगों में वितरित की जाती है, इसके बाद शुरू हो जाता है छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास,जो शुक्ल पक्ष की छठी की शाम को डूबती सूरज कोअर्धय दिया जाता है,अगले दिन ही उगते सूरज कोअर्घ्य के साथ पर्व की समाप्ति हो जाती है। इस पर्व को लेकर चारों ओर माहौल भक्ति में हो गया है। छठ पूजा के सामानों की बिक्री जोरों पर है,बाजारों में अपार भीड़ लगी हुई है,सभी लोग छठ व्रत के सामान की खरीदारी कर रहे हैं। महिलाओं के कंठ स्वर से निकली छठ मैया की गीतों से माहौल भक्तिमय हो जाता है, छठ गीत सुनने के लिए महिलाएं, युवक, युवतियां, बच्चे बच्चियों,पुरुषआकर्षित होती रहती हैं। छठव्रत सुखाए हुए गेहूं से प्रसाद बनती हैं,जिसमें ठेकुआ,खजूर,रोटी,रसियाव तैयार करती हैं जो प्रसाद वितरण में काम आता है। छठवर्ती घाट परअपने-अपनी

स्थान को छैकती हैं, वही पूजा पाठ करती हैं।जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन छठ घाटों की बैरिकेटिंग करने,नाव एवं नाविक, एसडीआर, एनडीआर की टीम की व्यवस्था,ड्रेस रूम बनाने,पुलिस की चाकचौबंद व्यवस्था करने में लगी रहती हैं,साथ ही पूजा समिति के लोगों के द्वारा,टेंट,पंडाल, लाइटनिंग, पेयजल, शौचालय ड्रेसिंगरूम की व्यवस्था भी की जाती है। घाटों पर विभिन्न प्रकार के आकर्षण केंद्र बन जाते हैं जहां बच्चों के लिए खिलौने के समान,झूला के अलावा अन्य मनमोहक आकर्षक दुकान लगी रहती हैं।

जो मेले का दृश्य नजर आती है।शाम से लेकर सुबह तक लगातार लोगआते जाते रहते हैं,सगे संबंधियों से मिलते जुलते हैं,खुशियां मनाते हैं।

सभी लोग अपने सगे संबंधियों,इष्ट मित्रों,पड़ोसियों, गरीब को प्रसाद का वितरण करते हैं।

Karunakar Ram Tripathi
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