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हदीस शरीफ जिंदगी का मार्गदर्शन करती है - नायब काजी

पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है हदीस शरीफ : हाफिज रहमत  

इस्लामी बहनों के लिए मकतब इस्लामियात व अल इस्लाह एकेडमी में विशेष कार्यशाला शुरू।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

इस्लामी बहनों के लिए जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद व मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में तीन माह तक चलने वाली चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला का आगाज रविवार को हुआ। 

अध्यक्षता करते हुए नायब काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि हदीस शरीफ हजरत पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पवित्र कथनों, कार्यों और आदतों का वर्णन है, जो इस्लाम में कुरआन-ए-पाक के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। हदीस शरीफ मुसलमानों के जीवन जीने के तरीके को मार्गदर्शन प्रदान करती है। हदीस शरीफ कुरआन-ए-पाक के सिद्धांतों और शिक्षाओं की गहराई से समझ प्रदान करती है। पैगंबर-ए-इस्लाम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के एक कथन के अनुसार, जो व्यक्ति धर्म के मामलों से संबंधित चालीस हदीसों को याद करता है, उसे कयामत के दिन एक विद्वान के रूप में उठाया जाएगा।

मुख्य अतिथि सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि हदीस शरीफ में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पवित्र कार्य और कर्म शामिल हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम द्वारा कही गई बातों को हदीस कहा जाता है, जो उनकी शिक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। हदीस शरीफ कुरआन के बाद मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन का स्रोत है। हदीस शरीफ मुसलमानों को जीवन के सभी पहलुओं में मार्गदर्शन प्रदान करती है, जैसे कि नमाज़ कैसे पढ़ें। हदीस शरीफ इस्लामी शरिया और नैतिकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।चालीस हदीसों का अध्ययन करने से हर मुसलमान को इस्लाम के बारे में बुनियादी और आवश्यक जानकारी मिलती है। चालीस हदीसों को याद करने और पढ़ने से मुसलमानों को अपनी आस्था और जीवन को इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार बेहतर ढ़ंग से जीने में मदद मिलती है।

संचालन करते हुए कारी मुहम्मद अनस रजवी ने कहा कि कार्यशाला का मकसद इस्लामी बहनों का आत्मविश्वास बढ़ाना व इस्लाम धर्म को अच्छे से समझने की कला को विकसित करना है। कार्यशाला प्रत्येक माह के प्रत्येक रविवार तक जारी रहेगी। तीन माह पूर्ण होने पर प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इस्लामी भाईयों की भी कार्यशाला जारी है। उन्होंने बताया कि इस्लामी विद्वानों ने हदीसों को कई संग्रहों में संकलित किया है। इनमें से सबसे प्रसिद्ध संग्रहों में से एक सहीह बुखारी है। इसके बाद सहीह मुस्लिम, सुनन अबू दाऊद, जामे तिर्मिजी, सुनन नसाई और सुनन इब्ने माजा। यह इस्लाम धर्म में हदीस के सबसे प्रामाणिक संग्रह माने जाते हैं। 

अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व अमान की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद, अली अहमद, ज्या वारसी, नौशीन फातिमा, शबनम, नूर सबा, शीरीन आसिफ, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, सना फातिमा, जिक्रा शेख, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया, आस्मां खातून, मुअज्जमा कुरैशी, शालीबा, सादिया नूर सहित तमाम लोगों ने शिरकत की।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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