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कुरआन-ए-पाक जीने का मुकम्मल तरीका है - हाफिज रहमत अली

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ में इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) के तीसरे सप्ताह में हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि कुरआन-ए-पाक हिकमत (बुद्धि और ज्ञान) का खजाना है क्योंकि यह न केवल एक पवित्र धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि जीवन के हर पहलू के लिए मार्गदर्शन का स्रोत भी है। कुरआन-ए-पाक में अल्लाह ने इंसानी जिंदगी के तमाम मसाइल और परेशानियों का हल बताया है। यह सिर्फ इबादत की पवित्र किताब ही नहीं, बल्कि जीने का मुकम्मल तरीका है। कुरआन-ए-पाक में मौजूद आयतें इंसान को हिदायत और रहमत प्रदान करती हैं। हिकमत का मतलब कुरआन के ज्ञान, समझ, दूरदर्शिता, तर्क और अल्लाह के खौफ से है। अल्लाह ने खुद कुरआन-ए-पाक को हकीम कहा है, जो हिकमत का स्रोत है। कुरआन-ए-पाक को पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने से ही दुनिया और आखिरत की कामयाबी है। कुरआन-ए-पाक हर ईमान वाले के लिए हिकमत और ज्ञान की वह दौलत है, जिसे जितना समझा जाए, उतनी ही नई अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

दर्स में आयशा खातून, शीरीन आसिफ, नाजिया खातून, तानिया अख्तर, आयशा आबिद, सैयदा यासमीन सहित तमाम महिलाएं व छात्राएं मौजूद रहीं।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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