1500वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी व 814वां उर्से ख्वाजा गरीब नवाज कार्यक्रम।
वसीम अकरम कुरैशी
जयपुर. राजस्थान।
सुन्नी दावते इस्लामी की ओर से आयोजित 1500वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी व 814वां उर्से ख्वाजा गरीब नवाज इज्तेमा में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जयपुर शहर मुफ्ती मौलाना मुफ्ती अब्दुस्सत्तार रजवी की सरपरस्ती में यहां घाटगेट पर आयोजित इज्तेमा में मुख्य अतिथि एवं सुन्नी दावते इस्लामी (मुम्बई) के अमीर मौलाना मुहम्मद शाकिर अली नूरी ने ख्वाजा गरीब नवाज की जीवनी पर विस्तार से रोशनी डाली। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती ने कुरान की तालीम को आम करने, इंसानियत और अमन व शांति के लिए सूफीइज्म की तालीम का प्रचार किया और बताया-अगर एक नौजवान अपने आप को बदलना चाहे तो बदल सकता है और समाज में इंकलाब पैदा कर सकता है।
मुख्य वक्ता अल्हाज मौलाना सय्यद अमीनुल कादरी किब्ला (मालेगांव) मुहब्बत ए रसूल के जरिए इस्लाम की बुनियादी व अखलाकी तालीम को आम करना और अल्लाह की बनाई कायनात में गौर करना व दुनियावी तालीम में बैदारी लाई जाए, इस सिलसिले में विस्तार से ख्याख्यान दिया।
अल्हाज मौलाना सय्यद मुहम्मद कादरी (जयपुर) ने नमाज की अहमियत पर विस्तार से व्याख्यान देते हुए कहा-जब बंदा अपने रब के आगे झुकता है तो वह अपने रब के करीब हो जाता है और डॉक्टर अल्लामा इकबाल के कोल-वो एक सज्दा जिसे तु गिरां समझता है हजार सज्दों से देता है आदमी को निजात, सुनाते हुए अपनी बात पर विराम दिया। वहीं विभिन्न इस्लामिक स्कॉलर्स ने हिंदुस्तान सूफी विचारधाराओं औलिया अल्लाह ख्वाजा गरीब नवाज के मानने वालों का है, इसमें सूफी विचार व औलिया अल्लाह की सुफिज्म शिक्षा को बढ़ावा दिया। नौजवानों को समाज सेवा के कामों के लिए जागरूक करना, देश व समाज की तरक्की और खुशहाली के लिए हर संभव प्रयास करना आदि विषयों पर विस्तार से ख्याख्यान दिए। सुन्नी इज्तेमा सलातो सलाम व दुआ के साथ संपन्न हुआ।
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