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पैगंबर-ए-इस्लाम से प्रेम ईमान की अनिवार्य शर्त :-हाफिज रहमत अली

चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला का तीसरा सप्ताह।

सैय्यद फरहान अहमद

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

इस्लामी बहनों व इस्लामी भाईयों के लिए मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा व जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद में चालीस हदीसों की विशेष कार्यशाला के तीसरे सप्ताह में रिसालत, पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से प्रेम व खूबियों के बारे में बताया गया।

मुख्य वक्ता हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से प्रेम इस्लामी आस्था (ईमान) की एक मूलभूत और अनिवार्य शर्त है। यह एक मुसलमान के लिए सभी सांसारिक रिश्तों, यहां तक कि अपने माता-पिता, बच्चों और अपनी जान से भी बढ़कर होनी चाहिए। पैगंबर-ए-इस्लाम से प्रेम एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव, सम्मान और आज्ञाकारिता है। पैगंबर-ए-इस्लाम से सच्चे प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण उनके आदेशों का पालन करना और उनके जीवन के आदर्श (सुन्नत) पर चलना है। आपके पद और संदेश की कद्र करना और उनका अत्यधिक सम्मान करना। 

विशिष्ट वक्ता कारी मुहम्मद रजवी ने कहा कि अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह और उसके रसूल की पसंद और नापसंद को अपनी इच्छाओं पर प्राथमिकता दीजिए। इस्लाम धर्म को हम तक पहुंचाने के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम ने जो कुर्बानियां और कठिनाइयां सहीं, उनकी कद्र कीजिए। किसी व्यक्ति का ईमान तब तक पूर्ण नहीं हो सकता जब तक कि पैगंबर-ए-इस्लाम उसे हर चीज से ज्यादा अजीज न हों। पैगंबर-ए-इस्लाम का जीवन हमारे लिए एक आदर्श है, जिससे हमें दुनिया और आखिरत में कामयाबी का रास्ता मिलता है।

अंत में दरूदो सलाम पढ़कर अमन व शांति की दुआ मांगी गई। कार्यशाला में वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, नेहाल अहमद, शहबाज सिद्दीकी, शीराज सिद्दीकी, ताबिश सिद्दीकी, ज्या वारसी, नौशीन फातिमा, शबनम, नूर सबा, शीरीन आसिफ, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, सना फातिमा, जिक्रा शेख, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया, मुअज्जमा कुरैशी, सादिया नूर सहित तमाम लोगों ने शिरकत की।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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